- बड़ा हताहत: कुवैत के बिजली और पानी (डीसैलिनेशन) प्लांट पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक ने अपनी जान गंवाई।
- 31वां दिन: मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन हमलों की रफ्तार और घातक हो गई है।
- जवाबी कार्रवाई: US-इजराइल के हमलों के पलटवार में ईरान ने कुवैत जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया।
Iran Kuwait Missile Strike , कुवैत सिटी — मिडिल ईस्ट का युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गया है। संघर्ष के 31वें दिन ईरान ने कुवैत के एक प्रमुख पावर और वॉटर डीसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया। इस हमले ने न केवल कुवैत की बुनियादी सुविधाओं को हिला दिया, बल्कि वहां काम कर रहे भारतीय कामगारों को भी अपनी चपेट में ले लिया। मलबे और आग के बीच से आई खबर के मुताबिक, इस प्लांट में कार्यरत एक भारतीय कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई। यह हमला अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई के जवाब में ईरान का अब तक का सबसे बड़ा ‘ओपनिंग मूव’ माना जा रहा है।
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मैदान पर बढ़ता ‘स्कोर’: कोई रुकने को तैयार नहीं
मिडिल ईस्ट की यह जंग अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रही। अमेरिका-इजराइल की जोड़ी और ईरान के बीच चल रहा यह ‘पावर गेम’ मासूमों की जान ले रहा है।
- टारगेटेड अटैक: ईरान ने कुवैत के बिजली संयंत्र को इसलिए चुना ताकि क्षेत्रीय सप्लाई लाइन को तोड़ा जा सके।
- भारतीयों पर खतरा: खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कार्यरत हैं, और इस ताजा हमले ने उनकी सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
- घातक हथियार: हमले में लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ, जिससे प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा है।
युद्ध के मैदान में दोनों पक्ष अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं। जहाँ अमेरिका और इजराइल ने अपने डिफेंस सिस्टम को अलर्ट मोड पर रखा है, वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके पास अभी और भी घातक विकल्प मौजूद हैं।
“मिडिल ईस्ट में स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। कुवैत के नागरिक ठिकानों पर हमला युद्ध के नियमों का सीधा उल्लंघन है। भारतीय कर्मचारी की मौत एक दुखद घटना है और हम वहां फंसे अपने अन्य नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार संपर्क में हैं।”
— विदेश मंत्रालय प्रवक्ता (अनुमानित)