इस्लामाबाद/क्विटा। पाकिस्तान के अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक नया वीडियो जारी कर पाकिस्तानी सेना के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें सैनिकों के अपहरण की बात से इनकार किया गया था। वीडियो में कम से कम 7 पाकिस्तानी सैनिक बीएलए की कैद में नजर आ रहे हैं, जो रोते हुए अपनी जान की भीख मांग रहे हैं और अपनी ही सरकार व सेना पर उन्हें लावारिस छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
वीडियो में सैनिकों का दर्द और गुहार
बीएलए के मीडिया द्वारा जारी इस वीडियो में बंधक बनाए गए सैनिक जमीन पर घुटनों के बल बैठे दिख रहे हैं। वीडियो की मुख्य बातें:
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पहचान पत्र दिखाए: सैनिकों ने कैमरे के सामने अपने आधिकारिक सर्विस कार्ड और नेशनल आईडी कार्ड दिखाए ताकि पाकिस्तानी सेना यह न कह सके कि वे उनके जवान नहीं हैं।
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भावुक अपील: एक सैनिक रोते हुए कह रहा है, “हम इस देश के लिए लड़ते हैं, लेकिन आज सेना हमें अपना मानने से इनकार कर रही है। मेरे पिता दिव्यांग हैं और मैं घर में सबसे बड़ा हूं। खुदा के वास्ते हमें बचा लीजिए।”
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सरकार पर सवाल: सैनिकों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी हुकूमत को अपने जवानों की जान की कोई परवाह नहीं है और वे उन्हें छुड़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
72 घंटे का अल्टीमेटम और ‘मौत की सजा’
BLA ने इस वीडियो के साथ पाकिस्तानी सरकार को अंतिम चेतावनी दी है:
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डेडलाइन: कैदियों की अदला-बदली (Prisoner Swap) के लिए 22 फरवरी 2026 तक का समय दिया गया है। अब इसमें मात्र 72 घंटे (3 दिन) शेष बचे हैं।
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मांग: बीएलए चाहता है कि पाकिस्तान की जेलों में बंद बलूच कैदियों को रिहा किया जाए, तभी इन सैनिकों को छोड़ा जाएगा।
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चेतावनी: संगठन ने कहा है कि यदि निर्धारित समय में बातचीत शुरू नहीं हुई, तो उनकी तथाकथित ‘बलूच नेशनल कोर्ट’ के आदेश पर इन सैनिकों को मौत की सजा दे दी जाएगी।
क्या है ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’?
बीएलए का दावा है कि इन सैनिकों को ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ के दौरान पकड़ा गया था। जनवरी के अंत और फरवरी की शुरुआत में बलूच लड़ाकों ने बलूचिस्तान के 12 शहरों में एक साथ हमले किए थे। हालांकि पाकिस्तानी सेना (ISPR) ने दावा किया था कि उन्होंने 200 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है, लेकिन बीएलए के इस वीडियो ने सेना के ‘सब ठीक है’ वाले दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान सरकार की चुप्पी
ताजा वीडियो सामने आने के बाद अभी तक पाकिस्तान सरकार या सैन्य प्रवक्ता (ISPR) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान इन मांगों को मानता है, तो यह आतंकवादियों के सामने घुटने टेकने जैसा होगा और यदि नहीं मानता, तो अपने ही सैनिकों की मौत का दोष सरकार पर आएगा।