Opium Cultivation News , बलरामपुर — पुलिस ने झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर चल रहे एक बड़े ड्रग सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है। तस्करों ने बलरामपुर के दुर्गम सरहदी गांवों को अफीम की खेती के लिए अपना नया सुरक्षित ठिकाना बना लिया था। कुसमी और कोरंधा के पहाड़ी इलाकों में पुलिस की टीम ने छापेमारी कर अवैध फसलों को बरामद किया है।
झारखंड में सख्ती, छत्तीसगढ़ में ‘शिफ्टिंग’
झारखंड पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में अफीम की खेती पर कड़ा प्रहार किया। इसका नतीजा यह हुआ कि तस्करों ने अपना पूरा नेटवर्क छत्तीसगढ़ की ओर मोड़ दिया। तस्करों ने बलरामपुर के उन गांवों को चुना जहां पहुंचना मुश्किल है। यहां न केवल खेती की जा रही थी, बल्कि कच्चे माल को प्रोसेस करने की भी तैयारी थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि एक स्थानीय भाजपा नेता ने इस अवैध खेती को संरक्षण दिया और जमीन उपलब्ध कराई। फिलहाल 2 और गांवों में अफीम की खेती होने की सूचना मिली है, जहां पुलिस दबिश देने की तैयारी में है।
“तस्कर अब बलरामपुर के दुर्गम इलाकों को अपना सॉफ्ट टारगेट बना रहे हैं। हमने कुसमी और कोरंधा में बड़ी कार्रवाई की है। राजनीतिक संरक्षण के दावों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।”
— पुलिस अधिकारी, बलरामपुर
यह मामला केवल ड्रग्स तक सीमित नहीं है। इसमें राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी गई। बलरामपुर पुलिस ने अब तक की कार्रवाई में भारी मात्रा में फसल को नष्ट किया है। इस खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ और झारखंड के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस अब उन स्थानीय कड़ियों को जोड़ रही है जिन्होंने झारखंड के तस्करों को छत्तीसगढ़ में शरण दी। अगर राजनीतिक संलिप्तता साबित होती है, तो यह प्रदेश की सियासत में बड़ा तूफान ला सकता है। बलरामपुर पुलिस जल्द ही इस गिरोह के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी का दावा कर रही है।