पटना, बिहार के फायर ब्रिगेड आईजी और 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी एम. सुनील नायक को पटना सिविल कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को उन्हें गिरफ्तार कर आंध्र प्रदेश ले जाने पहुंची आंध्र पुलिस की टीम को कोर्ट से खाली हाथ लौटना पड़ा। एसीजेएम-12 (ACJM-12) की अदालत ने कागजातों की कमी और प्रक्रियात्मक खामियों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए ट्रांजिट रिमांड की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।
कोर्ट में क्या हुआ? “बिना वारंट कार्रवाई स्वीकार नहीं”
सोमवार सुबह आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम पटना के शास्त्रीनगर स्थित आईजी नायक के सरकारी आवास पर पहुंची और उन्हें हिरासत में लेकर सिविल कोर्ट पहुंची। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि:
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वारंट का अभाव: आंध्र पुलिस के पास अधिकारी के खिलाफ कोई विधिवत गिरफ्तारी वारंट नहीं था।
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अधूरी केस डायरी: पुलिस ने अपडेटेड केस डायरी भी पेश नहीं की।
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वर्दी पर सवाल: कोर्ट में कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी के पहुंचे थे, जिस पर न्यायाधीश ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें कोर्ट रूम में ही बैठाए रखने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला? (2021 का विवाद)
यह पूरा विवाद मई 2021 का है, जब सुनील नायक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश के CID में डीआईजी के पद पर तैनात थे।
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पूर्व सांसद का आरोप: नरसापुरम के पूर्व सांसद और वर्तमान डिप्टी स्पीकर के. रघुराम कृष्णा राजू ने आरोप लगाया था कि हिरासत के दौरान उनके साथ गंभीर मारपीट की गई और उनकी जान लेने की कोशिश हुई।
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धारा 307 के तहत केस: इसी शिकायत के आधार पर नायक के खिलाफ IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज है।
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सत्ता परिवर्तन का असर: 2024 में आंध्र प्रदेश में टीडीपी गठबंधन की सरकार आने के बाद इस पुराने मामले में जांच तेज हुई और अधिकारियों पर शिकंजा कसा जाने लगा।
पटना में हड़कंप और जवानों का विरोध
जब आंध्र पुलिस आईजी नायक के आवास पर पहुंची, तो वहां बड़ी संख्या में होमगार्ड के जवान जमा हो गए और नारेबाजी की। जवानों का आरोप था कि एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ नियमों की अनदेखी कर कार्रवाई की जा रही है।