Ravi Pradosh Vrat 2026 : आज महादेव की विशेष कृपा का संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण व्रत कथा

Ravi Pradosh Vrat 2026 Ravi Pradosh Vrat 2026
Ravi Pradosh Vrat 2026

Ravi Pradosh Vrat 2026— हिंदू पंचांग के अनुसार, आज 1 मार्च 2026 को रवि प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। भगवान शिव को समर्पित यह व्रत रविवार के दिन पड़ने के कारण आरोग्य और सुख-समृद्धि की दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रदोष काल में महादेव की आराधना के बाद जब तक व्रत कथा का श्रवण या पठन न किया जाए, तब तक पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

Ravi Pradosh Vrat 2026: आज महादेव की विशेष कृपा का संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण व्रत कथा

Ravi Pradosh Vrat 2026
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पूजा का शुभ मुहूर्त और समय

ज्योतिष गणना के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 1 मार्च 2026 को सुबह 08:45 बजे से हो रहा है, जो 2 मार्च की सुबह 06:12 बजे तक रहेगी। प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा शाम के समय (प्रदोष काल) की जाती है। आज पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय शाम 06:18 बजे से रात 08:42 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं के लिए शिव मंदिरों में विशेष इंतजाम किए गए हैं, विशेषकर ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों में भारी भीड़ की संभावना है।

पौराणिक रवि प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक गरीब ब्राह्मण रहता था जिसकी मृत्यु के बाद उसकी पत्नी और पुत्र भिक्षा मांगकर जीवन यापन करते थे। एक दिन उन्हें विदर्भ देश का राजकुमार मिला, जिसके पिता का राज्य छीन लिया गया था। ब्राह्मणी ने उसे शरण दी। एक दिन वन में राजकुमार की भेंट ‘गंधर्व कन्याओं’ से हुई, जिनमें से एक का नाम अंशुमती था।

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अंशुमती के माता-पिता को जब राजकुमार के बारे में पता चला, तो उन्होंने भगवान शिव की प्रेरणा से अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया। राजकुमार ने अपनी पत्नी और ब्राह्मण पुत्र के साथ मिलकर कठिन संघर्ष किया और अंततः महादेव के आशीर्वाद से अपना खोया हुआ राज्य वापस पा लिया। ब्राह्मण परिवार की दरिद्रता दूर हो गई और वे सुखपूर्वक रहने लगे। यह सब रवि प्रदोष व्रत के प्रभाव से संभव हुआ, जिसने उनके जीवन के अंधकार को मिटा दिया।

Voices from the Ground / विद्वानों का मत

“रविवार को आने वाला प्रदोष व्रत न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाता है, बल्कि कुंडली में सूर्य की स्थिति को भी मजबूत करता है। भक्तों को आज के दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।”
— पंडित रमेश शास्त्री, प्रधान पुजारी, स्थानीय शिव मंदिर

श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइन और तैयारी

राजधानी सहित विभिन्न शहरों के प्रमुख मंदिरों में आज शाम रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यदि आप मंदिर जा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि प्रदोष काल की पूजा सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक के समय में करना सबसे उत्तम है। व्रत खोलने से पहले दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।

 

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