डिप्रेशन में युवाओं की थकान का रहस्य: ऊर्जा असंतुलन पर नया संकेत

The secret to youth fatigue in depression The secret to youth fatigue in depression
The secret to youth fatigue in depression

डिप्रेशन में युवाओं की थकान का रहस्य— डिप्रेशन से जूझ रहे युवाओं में लगातार थकान और काम करने की इच्छा की कमी अब सिर्फ मानसिक नहीं मानी जा रही।  शोध में संकेत मिला है कि इसके पीछे शरीर में होने वाला ऊर्जा असंतुलन (Energy Imbalance) एक अहम वजह हो सकता है।

डिप्रेशन में युवाओं की थकान का रहस्य: ऊर्जा असंतुलन पर नया संकेत

The secret to youth fatigue in depression
The secret to youth fatigue in depression

क्या कहता है नया अध्ययन

शोध के मुताबिक, डिप्रेशन से प्रभावित युवाओं के शरीर में ऊर्जा का उत्पादन और उपयोग संतुलित नहीं रहता। इसका सीधा असर उनके दिमाग और शरीर दोनों पर पड़ता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि ऐसे लोग अक्सर कम समय में थक जाते हैं, उनका ध्यान जल्दी भटकता है और साधारण काम भी भारी लगने लगता है। यह सिर्फ “आलस” नहीं बल्कि शरीर के अंदर चल रही एक जैविक प्रक्रिया का परिणाम हो सकता है।

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थकान क्यों बढ़ती है?

  • शरीर में ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है
  • मस्तिष्क को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती
  • हार्मोन असंतुलन से मोटिवेशन कम होता है
  • नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है

विशेषज्ञों का कहना है कि जब शरीर ऊर्जा को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो व्यक्ति को हर काम में ज्यादा मेहनत महसूस होती है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

“डिप्रेशन सिर्फ भावनात्मक स्थिति नहीं है। यह शरीर की ऊर्जा प्रणाली को भी प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति लगातार थका हुआ महसूस करता है।”
— मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ

युवाओं पर क्या असर पड़ रहा है

कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में यह समस्या तेजी से देखी जा रही है। कई छात्र बताते हैं कि वे पढ़ाई शुरू तो करते हैं, लेकिन कुछ ही मिनटों में थकान महसूस होने लगती है।

इसका असर उनकी पढ़ाई, करियर और आत्मविश्वास पर पड़ता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

अब आगे क्या?

विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि ऐसे लक्षण दिखने पर इसे नजरअंदाज न करें। सही नींद, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या मदद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर से संपर्क करना जरूरी है।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां भी अब मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ फिजिकल एनर्जी मैनेजमेंट पर ध्यान देने की बात कर रही हैं।

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