- बड़ा रिवॉर्ड: वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से 10 हजार वर्षों की तपस्या और कन्यादान के बराबर फल मिलता है।
- स्पेशल लाइनअप: वैशाख माह में भगवान विष्णु के ‘मधुसूदन’ और ‘वराह’ रूप की होती है विशेष पूजा।
- विनिंग फॉर्मूला: व्रत और दान के जरिए भक्त पा सकते हैं जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष।
Varuthini Ekadashi 2026 , नई दिल्ली — हिंदू धर्म के कैलेंडर में एकादशी की तिथि किसी ‘ग्रैंड फिनाले’ से कम नहीं है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली वरूथिनी एकादशी को शास्त्रों में सौभाग्य और मोक्ष का सबसे बड़ा द्वार माना गया है। यह दिन उन भक्तों के लिए एक ‘गोल्डन चांस’ है जो अपने पापों का क्लीन स्वीप कर श्रीहरि का आशीर्वाद चाहते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और दान, स्वर्ण दान के पुण्य को भी पीछे छोड़ देता है।
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मैदान का हाल: मधुसूदन और वराह अवतार की ‘पिच रिपोर्ट’
वरूथिनी एकादशी पर पूजा की रणनीति बिल्कुल अलग होती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के ‘मधुसूदन’ रूप को याद करते हैं। यह वही रूप है जिसने मधु नामक दैत्य का संहार कर धर्म की स्थापना की थी।
- डिफेंस स्ट्रेटेजी: एकादशी के दिन अन्न का त्याग सबसे मजबूत डिफेंस माना गया है। भक्त पूरे दिन व्रत रखकर अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल करते हैं।
- स्कोरिंग एरिया: इस तिथि पर दान का महत्व सबसे ज्यादा है। कन्यादान को दुनिया का सबसे बड़ा दान माना जाता है, और वरूथिनी एकादशी का व्रत इसके बराबर का स्कोर (पुण्य) दिलाता है।
- स्पेशल ड्रिल: भगवान वराह की अर्चना करने से भूमि और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है।
ज्योतिषियों के मुताबिक, जो भक्त इस दिन पूरी निष्ठा से व्रत रखते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता का ‘नॉकआउट’ हो जाता है और उन्हें बैकुंठ धाम में जगह मिलती है।
“वरूथिनी एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण का महाकुंभ है। इसमें किया गया दान अक्षय होता है और भक्त को सीधा श्रीहरि की शरण में ले जाता है।” — धर्मशास्त्र विशेषज्ञ