- बड़ा नतीजा: कोर्ट ने आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ रुबी सिंह को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
- कमजोर डिफेंस: अभियोजन पक्ष पुख्ता सबूत पेश करने में पूरी तरह फेल रहा।
- अंपायर का फैसला: जज नीरज शर्मा ने “संदेह का लाभ” देते हुए रुबी सिंह को राहत दी।
Virendra Singh Tomar Acquitted , रायपुर — छत्तीसगढ़ की राजधानी के सबसे चर्चित ‘मुकाबलों’ में से एक, 2013 रायपुर गोलीकांड, का फाइनल फैसला आ गया है। करीब 13 साल तक चली कानूनी खींचतान के बाद, कोर्ट ने आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ रुबी सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज शर्मा की अदालत ने अभियोजन पक्ष के दावों को अपर्याप्त मानते हुए आरोपी को क्लीन चिट दे दी।
मैदान का हाल: कमजोर गवाही ने बिगाड़ा अभियोजन का खेल
2013 के इस मामले ने रायपुर की कानून-व्यवस्था की रेटिंग हिला दी थी। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में रुबी सिंह को मुख्य हमलावर के रूप में पेश किया था। हालांकि, कोर्ट के ‘ट्रायल’ के दौरान अभियोजन पक्ष की फील्डिंग काफी कमजोर नजर आई।
- मामले की अवधि: 13 साल (2013 से 2026)।
- कोर्ट रूम: प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, रायपुर।
- अहम वजह: गवाहों के बयानों में विरोधाभास और फॉरेंसिक सबूतों की कमी।
“अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा। पेश किए गए साक्ष्य इतने पुख्ता नहीं थे कि उनके आधार पर सजा सुनाई जा सके।” — नीरज शर्मा, न्यायाधीश, रायपुर कोर्ट