Vladimir Putin Pakistan Statement : FOIA दस्तावेजों से खुलासा, पश्चिम क्यों करता रहा पाकिस्तान की अनदेखी?

Vladimir Putin Pakistan Statement :  मॉस्को/वॉशिंगटन। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वर्ष 2001 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से अपनी पहली मुलाकात के दौरान पाकिस्तान को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। पुतिन ने कहा था कि पाकिस्तान वास्तव में एक सैन्य शासन यानी जुंटा है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं और यह कोई लोकतांत्रिक देश नहीं है। इसके बावजूद पश्चिमी देश पाकिस्तान की आलोचना नहीं करते, जो वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।

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पुतिन के अनुसार, इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए थी, क्योंकि हालात बिगड़ने की स्थिति में परमाणु तकनीक गलत हाथों में जा सकती है। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीतिक अस्थिरता और उसके परमाणु कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम को लेकर आशंका जताई थी।

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यह जानकारी वर्ष 2001 से 2008 के बीच पुतिन और बुश के बीच हुई बातचीत से जुड़े डीक्लासिफाइड दस्तावेजों के सामने आने के बाद उजागर हुई है। ये दस्तावेज अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव ने सूचना के अधिकार कानून (FOIA) के तहत जारी किए हैं।

पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा पर उठे सवाल
इन चर्चाओं के दौरान पाकिस्तान के कुख्यात ‘ए.क्यू. खान नेटवर्क’, ईरान और उत्तर कोरिया तक परमाणु तकनीक पहुंचने की आशंका और पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई गई थी। पुतिन का मानना था कि परमाणु हथियारों से लैस किसी गैर-लोकतांत्रिक देश का अस्तित्व वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।

उस समय पाकिस्तान में सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ का शासन था। 9/11 आतंकी हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ जंग में अमेरिका और रूस दोनों ही पाकिस्तान का सहयोग ले रहे थे, लेकिन इसके बावजूद दोनों नेताओं को पाकिस्तान की न्यूक्लियर पॉलिसी और नियंत्रण प्रणाली पर पूरा भरोसा नहीं था।

पुतिन-बुश संबंधों में दिखा सम्मान
इन्हीं चर्चाओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने यह भी कहा था कि रूस पश्चिमी देशों का हिस्सा है, कोई दुश्मन नहीं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान जताया था। बाद में बुश ने कहा था कि उन्होंने पुतिन को करीब से समझा और उन्हें एक भरोसेमंद नेता पाया।

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