रायपुर: छत्तीसगढ़ में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा के द्वार और अधिक सुलभ होने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ (RTE Act 2009) के तहत प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राज्य में RTE के तहत प्रवेश केवल ‘पहली कक्षा’ (Class 1) से ही मान्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है।
क्या है नया नियम?
पूर्व में RTE के तहत अलग-अलग कक्षाओं में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर अक्सर अनियमितताओं की शिकायतें मिलती थीं। सरकार ने अब इसे पूरी तरह व्यवस्थित करने का निर्णय लिया है।
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केवल पहली कक्षा में प्रवेश: अब RTE के तहत केवल पहली कक्षा में ही बच्चों को दाखिला मिलेगा। इससे प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहेगी।
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सीटों की संख्या में इजाफा: शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए RTE सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। सरकार का मानना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा गरीब होनहार छात्रों को प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलेगा।
सरकार का उद्देश्य: पारदर्शिता और जवाबदेही
सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से RTE सीटों के ‘प्रकटीकरण’ (Disclosure) में होने वाली धांधली पर पूर्ण विराम लगेगा। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, कई बार स्कूलों द्वारा RTE के तहत रिक्त सीटों की गलत जानकारी दी जाती थी, जिससे पात्र बच्चे वंचित रह जाते थे। इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को अधिनियम का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
गरीब छात्रों के सपनों को मिलेगी उड़ान
विष्णु सरकार की इस पहल से उन होनहार बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी जो महंगे स्कूलों की फीस भरने में असमर्थ हैं। पहली कक्षा से ही प्रवेश मिलने के कारण बच्चे अपनी स्कूली शिक्षा की शुरुआत अच्छे शैक्षणिक वातावरण में कर सकेंगे, जिससे उनके भविष्य की नींव और अधिक मजबूत होगी।