बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी मल्हार (बिलासपुर) से एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है। केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम’ अभियान के तहत, स्थानीय निवासी संजीव पाण्डेय के निवास से लगभग 3 किलोग्राम वजनी एक दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताम्रपत्र लगभग 2000 वर्ष पुराना है और इस पर उत्कीर्ण लेख भारतीय इतिहास के कई अनसुलझे पहलुओं को उजागर कर सकते हैं।
क्या है ताम्रपत्र ?
पुरातत्वविदों के अनुसार, यह ताम्रपत्र न केवल वजन में भारी है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद मूल्यवान है:
-
प्राचीन लिपि: ताम्रपत्र पर ‘ब्राह्मी लिपि’ में लेख उत्कीर्ण हैं। ब्राह्मी लिपि को भारत की सबसे प्राचीन लिपियों में से एक माना जाता है, जो मौर्य काल से लेकर कई शताब्दियों तक प्रचलन में रही।
-
पाली भाषा का प्रयोग: इसमें ‘पाली भाषा’ का उपयोग किया गया है, जिसका सीधा संबंध बौद्ध धर्म के ग्रंथों और तत्कालीन शिक्षा पद्धति से रहा है। इससे इसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्यों अहम है यह खोज?
मल्हार हमेशा से ही पुरातात्विक दृष्टि से छत्तीसगढ़ का एक समृद्ध केंद्र रहा है। विशेषज्ञों का प्रारंभिक अनुमान है कि प्राचीन काल में इस प्रकार के ताम्रपत्रों का उपयोग मुख्य रूप से तीन कार्यों के लिए किया जाता था:
-
भूमि दान के साक्ष्य: किसी राजा या रईस द्वारा भूमि दान देने के आधिकारिक प्रमाण के रूप में।
-
राजकीय आदेश: राजाओं द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण फरमान या घोषणाएं।
-
धार्मिक घोषणाएं: मठों या मंदिरों को दिए गए संरक्षण और दान का विवरण।
‘ज्ञान भारतम’ अभियान: एक महाप्रयास
संस्कृति मंत्रालय का ‘ज्ञान भारतम’ अभियान देश की लुप्त होती पांडुलिपियों और प्राचीन दस्तावेजों को सहेजने का एक राष्ट्रव्यापी महाभियान है। इस अभियान के तहत ग्राम सभाओं और जनभागीदारी के जरिए लोगों को अपनी पुरानी पांडुलिपियों को सामने लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहाँ लोग अपने घरों में संजोकर रखी ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं।