नई दिल्ली : वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, यानी आज 28 अप्रैल 2026 को ‘भौम प्रदोष व्रत’ रखा जा रहा है। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे ‘भौम प्रदोष’ कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव और मंगल ग्रह दोनों को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज का दिन उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जो कर्ज, मंगल दोष या आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे हैं।
क्यों खास है आज का भौम प्रदोष व्रत?
भौम प्रदोष व्रत को ‘मंगल प्रदोष’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं।
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मंगल दोष से मुक्ति: जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके लिए आज के दिन शिव जी की पूजा करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
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कर्ज से राहत: मंगलवार का दिन होने के कारण, इस दिन व्रत रखने से आर्थिक परेशानियों और कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलती है।
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शक्ति और साहस: यह व्रत भक्तों में आत्मविश्वास, साहस और शक्ति का संचार करने वाला माना जाता है।
पूजा और तिथि का सटीक मुहूर्त
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त के बाद का समय) में ही करनी चाहिए।
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त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 अप्रैल 2026, शाम 6:51 बजे।
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त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 अप्रैल 2026, शाम 7:51 बजे।
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पूजा का श्रेष्ठ समय (प्रदोष काल): आज शाम 6:54 बजे से रात 9:04 बजे तक।
प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करना सबसे उत्तम माना जाता है, इसलिए इसी समय पूजा करना सुनिश्चित करें।
पूजा की सरल विधि
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शुद्धिकरण: आज सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव मंदिर या घर के पूजा स्थल पर व्रत का संकल्प लें।
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अभिषेक: शाम के शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल) में भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
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श्रृंगार: शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद चंदन, धतूरा और अक्षत अर्पित करें।
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मंत्र जाप: पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
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व्रत कथा: शिव-पार्वती की आरती के साथ व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।