Rahul Gandhi ‘नई दिल्ली, 1 मई 2026 केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना’ को लेकर देश में एक नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी द्वारा इस परियोजना को लेकर उठाए गए गंभीर सवालों के बाद, सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने Rahul Gandhi’ के सभी आरोपों को खारिज करते हुए इस प्रोजेक्ट को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के लिए ‘अपरिहार्य’ करार दिया है।
राहुल गांधी के आरोप: ‘जल-जंगल-जमीन का हो रहा दोहन’
पिछले दिनों ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा करने के बाद राहुल गांधी ने इस परियोजना पर कड़ा प्रहार किया था। उन्होंने इसे पर्यावरण और स्थानीय जनजातियों के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया।
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‘मेगा स्कैम’ का आरोप: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह परियोजना कुछ खास कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए लाई गई है।
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पर्यावरण की क्षति: उन्होंने दावा किया कि प्रोजेक्ट के नाम पर लाखों पेड़ों की कटाई हो रही है, जिससे द्वीप का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तबाह हो जाएगा।
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जनजातीय अधिकार: राहुल ने कहा कि यह आदिवासियों की ‘जल, जंगल और जमीन’ छीनने की कोशिश है।
सरकार का पलटवार: ‘रणनीतिक दृष्टि से अनिवार्य है प्रोजेक्ट’
केंद्र सरकार का कहना है कि ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए हिंद महासागर में ‘चौकीदार’ की तरह है।
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राष्ट्रीय सुरक्षा: सरकार के अनुसार, मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के पास होने के कारण यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों को देखते हुए यहाँ एक मजबूत सैन्य और समुद्री बेस बनाना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
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आर्थिक केंद्र: इस परियोजना के तहत एक इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनाया जा रहा है। इससे भारत वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र बनेगा और कोलंबो या सिंगापुर जैसे बंदरगाहों पर निर्भरता कम होगी।
पर्यावरण संरक्षण के दावे
विपक्ष के पर्यावरण संबंधी आरोपों पर सफाई देते हुए सरकार ने कहा कि परियोजना को सभी आवश्यक क्लीयरेंस मिल चुके हैं।
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जितने जंगल काटे जाएंगे, उसके बदले देश के अन्य हिस्सों में व्यापक वृक्षारोपण (Compensatory Afforestation) किया जा रहा है।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि स्थानीय ‘शोम्पेन’ और ‘निकोबारी’ जनजातियों के आवास और संस्कृति पर कोई आंच न आए।