विदेशी मुद्रा बचाने पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री ने मंच से साफ शब्दों में कहा कि हर नागरिक को देशहित में अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने लोगों से ऐसे खर्च कम करने की अपील की जिनसे विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। सभा में मौजूद लोग शांत होकर भाषण सुन रहे थे। गर्म हवा चल रही थी, लेकिन आर्थिक मुद्दे पर पीएम का सीधा संदेश भीड़ के बीच अलग असर छोड़ रहा था। पीएम मोदी ने कहा, “हमें हर छोटे-बड़े प्रयास के जरिए देश के संसाधनों की रक्षा करनी है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयात पर निर्भरता घटाना जरूरी है। खासतौर पर सोने के आयात पर होने वाला भारी खर्च चिंता का विषय है।
आर्थिक दबाव और सोने का बढ़ता आयात
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है। शादी-ब्याह और निवेश के लिए सोने की मांग लगातार बढ़ती रही है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमत बढ़ने पर देश का आयात बिल भी ऊपर चला जाता है। यही वजह है कि सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने की कोशिश कर रही है। सभा के दौरान पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल की खपत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऊर्जा बचत अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन चुकी है।