नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार 26 मई को चौथा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन विशेष रूप से हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि मंगलवार को हनुमान जी की उपासना करने से भय, रोग और बाधाएं दूर होती हैं। खासकर बड़े मंगल के दिन की गई साधना साधकों के लिए विशेष फल देने वाली मानी जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा करने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
सुंदरकांड पाठ का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सुंदरकांड का पाठ जीवन में साहस, धैर्य और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
इस अवसर पर सुंदरकांड की कुछ पंक्तियों को विशेष रूप से शुभ माना जाता है, जिनमें हनुमान जी की वीरता, भक्ति और श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा का वर्णन मिलता है।
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प्रमुख पंक्तियों का भावार्थ
- जामवंत के वचन सुनकर हनुमान जी ने समुद्र पार कर माता सीता की खोज का संकल्प लिया। यह पंक्ति धैर्य और साहस का प्रतीक मानी जाती है।
- हनुमान जी का शरीर सोने के पर्वत जैसा शक्तिशाली बताया गया है, जो संकटों का नाश करने की क्षमता रखता है।
- प्रभु श्रीराम को हृदय में रखकर कार्य करने का संदेश दिया गया है, जिससे जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और शत्रु भी मित्र बन सकते हैं।
श्रद्धा और आस्था का पर्व
बड़े मंगल के दिन भक्त मंदिरों में जाकर हनुमान जी का दर्शन करते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं और सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं।