Bengal Cabinet Expansion 2026 : कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में सोमवार को 35 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल ने सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी इस दौरान मौजूद रहे।मंत्रिमंडल विस्तार में 13 नेताओं को कैबिनेट मंत्री, 3 को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 नेताओं को राज्य मंत्री बनाया गया है। नए विस्तार के बाद राज्य मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है।गौरतलब है कि इससे पहले 9 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पद की शपथ ली थी। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और क्षुदीराम टुडू ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी।
मंत्रिपरिषद में अभी 3 पद खाली
संविधान के 91वें संशोधन के अनुसार किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 विधायक हैं, जिसके आधार पर राज्य में अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
सोमवार को हुए विस्तार के बाद मंत्रियों की संख्या 41 पहुंच गई है। इस प्रकार मंत्रिपरिषद में अभी भी 3 पद रिक्त हैं। हालांकि फिलहाल इन पदों को भरने की कोई घोषणा नहीं की गई है।
विभागों का पहले ही हो चुका है बंटवारा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 11 मई को मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन किया था। इसके तहत निशीथ प्रमाणिक को उत्तर बंगाल विकास, खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, पशु संसाधन विकास और कृषि विपणन विभाग सौंपा गया है। वहीं अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण तथा नगर निकाय विभाग की जिम्मेदारी मिली है।
अशोक कीर्तनिया को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा सहकारिता विभाग का प्रभार दिया गया है। क्षुदीराम टुडू को जनजातीय विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गृह और वित्त सहित कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास ही रखे हैं।
प्रशासन को मिलेगी नई गति
सरकार का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और विभिन्न विभागों में योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विस्तार सरकार के संगठनात्मक और प्रशासनिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।