Raigarh 33 KV Line Case : हाथी प्रभावित वन क्षेत्र में बिजली लाइन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और कंपनी से जवाब तलब

High Court takes a strict stance regarding 33 kV line in elephant-affected forest area. High Court takes a strict stance regarding 33 kV line in elephant-affected forest area.
High Court takes a strict stance regarding 33 kV line in elephant-affected forest area.

Raigarh 33 KV Line Case : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित बिजली कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।

High Court takes a strict stance regarding 33 kV line in elephant-affected forest area.
High Court takes a strict stance regarding 33 kV line in elephant-affected forest area.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि पर गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं। साथ ही 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन का विस्तार भी नियमों और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन कर किया गया।

राज्य सरकार को जवाब के लिए एक सप्ताह का समय

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सुनवाई के दौरान राज्य और केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। जवाब मिलने के बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति भी दी गई है। निजी कंपनी की ओर से पहले ही जवाब दाखिल किए जाने की जानकारी कोर्ट को दी गई।

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11 केवी लाइन के नाम पर 33 केवी लाइन बिछाने का आरोप

याचिका के अनुसार, भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण के दौरान सीएसपीडीसीएल के नए पोल लगाए गए। आरोप है कि इन्हीं पोलों का उपयोग निजी जल विद्युत परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए किया गया, ताकि अलग से वन भूमि डायवर्सन और वैधानिक अनुमतियों की आवश्यकता से बचा जा सके।

अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप

याचिकाकर्ता का आरोप है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी संसाधनों का उपयोग निजी परियोजना के हित में किया गया। इससे सरकारी प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

पहले भी खारिज हो चुकी थी याचिका

इस मामले में याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय पहले भी हाईकोर्ट पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा राशि जमा करने से छूट की मांग खारिज होने के बाद 7 मई 2026 को याचिका निरस्त कर दी गई थी। अदालत ने नियमानुसार सुरक्षा राशि जमा कर नई याचिका दायर करने की अनुमति दी थी, जिसके बाद यह नई जनहित याचिका दाखिल की गई।

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