अस्थायी युद्धविराम बढ़ाने पर फंसा पेंच
यह तल्ख चेतावनी उस समय सामने आई है, जब दोनों देशों के वार्ताकार अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए अस्थायी युद्धविराम को 60 दिन और बढ़ाने के लिए आमने-सामने बैठे हैं। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य एक स्थायी समझौते का रास्ता तैयार करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। करीब 2 घंटे तक चली इस महत्वपूर्ण मीटिंग के बाद भी कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका और राष्ट्रपति ने इस निर्णय को फिलहाल टाल दिया।
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ईरान का कड़ा रुख: ‘हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं’
दूसरी तरफ, ईरान ने इस समझौते के लिए किसी भी तरह की समयसीमा मानने से साफ इनकार कर दिया है। तेहरान ने साफ किया है कि जब तक वाशिंगटन ठोस और व्यावहारिक कदम नहीं उठाता, तब तक वह अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं करेगा। ईरान के इस रुख से खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है।
वैश्विक बाजारों और कूटनीति पर असर
दोनों देशों के बीच बढ़ते इस गतिरोध का असर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और तेल आपूर्ति बाजारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। सिंगापुर समिट में मौजूद रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि अगले 48 घंटों में युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बनी, तो खाड़ी क्षेत्र में दोनों सेनाएं एक बार फिर आमने-सामने हो सकती हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने पहले ही अपने रणनीतिक ठिकानों को अलर्ट मोड पर रखा है।
