Supreme Court’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सेंट्रल जेल में एक कैदी की मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और गृह सचिव को तलब किया है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को 4 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित होकर राज्य सरकार का पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा सरकार का जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान जेल में हुई मौत की परिस्थितियों और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
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4 अगस्त को होने वाली सुनवाई में डीजीपी और गृह सचिव वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित रहेंगे और पूरे मामले पर सरकार का पक्ष रखेंगे।
हाईकोर्ट के मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा मृतक के परिजनों को दिए गए एक लाख रुपये के मुआवजे को प्रथम दृष्टया अपर्याप्त बताया। अदालत ने संकेत दिए कि हिरासत या जेल में हुई मौत जैसे मामलों में पीड़ित परिवार को उचित और न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।
हालांकि अंतिम निर्णय अगली सुनवाई और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही लिया जाएगा।
जेल प्रशासन की जवाबदेही पर उठे सवाल
कैदी की मौत के बाद से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले ने जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और मानवाधिकारों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी कैदी की हिरासत में मौत होती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।