CG Agriculture Teacher Recruitment : छत्तीसगढ़ में कृषि शिक्षक भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव, अब B.Ed और TET के बिना नहीं मिलेगी नौकरी

CG Agriculture Teacher Recruitment : रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि विषय के शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने कृषि शिक्षक भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब बी.एड. (B.Ed) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण किए बिना कृषि शिक्षक के पद पर नियुक्ति नहीं दी जाएगी। नए नियमों का उद्देश्य स्कूलों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना बताया गया है।

भर्ती नियमों में किया गया अहम संशोधन

राज्य सरकार द्वारा जारी संशोधित प्रावधानों के अनुसार, कृषि विषय के शिक्षक पद के लिए केवल विषय में शैक्षणिक योग्यता होना पर्याप्त नहीं होगा। अब अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य रूप से बी.एड. की डिग्री और मान्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) भी उत्तीर्ण करनी होगी।

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सरकार का मानना है कि इससे विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होगी और छात्रों को प्रशिक्षित शिक्षकों से पढ़ने का अवसर मिलेगा।

B.Ed और TET बने अनिवार्य

नए नियम लागू होने के बाद कृषि शिक्षक पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को संबंधित विषय में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ बी.एड. और TET की पात्रता भी प्रस्तुत करनी होगी। इन दोनों योग्यताओं के अभाव में अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे।

यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षक भर्ती से जुड़े मानकों के अनुरूप माना जा रहा है।

अभ्यर्थियों को पहले से करनी होगी तैयारी

भर्ती नियमों में बदलाव के बाद ऐसे अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी की रणनीति बदलनी होगी, जिन्होंने अभी तक बी.एड. या TET पूरा नहीं किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की शिक्षक भर्तियों में इन योग्यताओं का महत्व और बढ़ेगा, इसलिए इच्छुक उम्मीदवारों को समय रहते आवश्यक पात्रताएं हासिल करनी चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा लाभ

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित और पात्र शिक्षकों की नियुक्ति से स्कूलों में कृषि शिक्षा का स्तर बेहतर होगा। छात्रों को विषय की व्यावहारिक और वैज्ञानिक जानकारी प्रभावी ढंग से मिल सकेगी, जिससे कृषि शिक्षा को भी नई दिशा मिलेगी।

सरकार का उद्देश्य केवल रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था विकसित करना है।

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