नई दिल्ली। Harbhajan Singh: टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज का तिहरा शतक बनाना बेहद खास उपलब्धि माना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में 300 या उससे ज्यादा रन की पारियां काफी कम देखने को मिली हैं। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने इसकी बड़ी वजह टी20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव को बताया है। उनका मानना है कि आधुनिक बल्लेबाजों में आक्रामकता तो बढ़ी है, लेकिन लंबे समय तक क्रीज पर टिककर खेलने का धैर्य कम हुआ है।
T20 ने बदला बल्लेबाजों का अंदाज
हरभजन सिंह ने एक पॉडकास्ट में टेस्ट क्रिकेट में बड़ी पारियों की कमी पर बात करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में ऐसे बल्लेबाज कम हैं, जो एक पारी में 250 से 300 रन तक बनाने के लिए लंबे समय तक क्रीज पर टिक सकें।
उनके मुताबिक, टी20 क्रिकेट ने बल्लेबाजों के खेलने के तरीके को काफी प्रभावित किया है। छोटे फॉर्मेट में तेजी से रन बनाने के लिए लगातार बड़े शॉट खेलने की आदत टेस्ट क्रिकेट में भी नजर आती है। ऐसे में बल्लेबाज के आउट होने का जोखिम बढ़ जाता है और वह लंबी पारी खेलने से पहले ही अपना विकेट गंवा देता है।
पहले बल्लेबाजों में था गजब का धैर्य
हरभजन ने टेस्ट क्रिकेट की पिछली पीढ़ी के बल्लेबाजों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में खिलाड़ी आक्रामक क्रिकेट खेलने के साथ-साथ लंबे समय तक बल्लेबाजी करने में भी सक्षम थे।
उन्होंने ब्रायन लारा, क्रिस गेल, वीरेंद्र सहवाग और मैथ्यू हेडन जैसे बल्लेबाजों का जिक्र किया। ब्रायन लारा ने टेस्ट क्रिकेट में नाबाद 400 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। वहीं सहवाग और गेल जैसे बल्लेबाजों ने भी टेस्ट क्रिकेट में तिहरे शतक लगाए हैं।
हरभजन के अनुसार, मौजूदा दौर में बल्लेबाजों के पास बड़े शॉट खेलने की क्षमता जरूर है, लेकिन 250-300 रन तक पहुंचने के लिए जिस तरह के संयम और एकाग्रता की जरूरत होती है, वह कम देखने को मिल रही है।
‘तिहरा शतक हो गया ईद का चांद’
हरभजन सिंह ने मौजूदा स्थिति को समझाते हुए कहा कि टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक अब ‘ईद का चांद’ बन गया है। यानी ऐसी उपलब्धि अब बेहद कम देखने को मिलती है।
हाल के वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों में अजहर अली (2016), डेविड वार्नर (2019), हैरी ब्रूक (2024) और वियान मुल्डर (2025) के नाम शामिल हैं।
सचिन और विराट भी नहीं बना सके तिहरा शतक
टेस्ट क्रिकेट में कई महान बल्लेबाजों ने शानदार दोहरे शतक लगाए हैं, लेकिन वे तिहरे शतक के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए। सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, राहुल द्रविड़ और रिकी पोंटिंग जैसे दिग्गज भी टेस्ट क्रिकेट में 300 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सके।
यही वजह है कि टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक आज भी बल्लेबाज की असाधारण क्षमता और धैर्य का प्रतीक माना जाता है।
वैभव सूर्यवंशी की हरभजन ने की तारीफ
हरभजन सिंह ने इस दौरान भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने वैभव की विस्फोटक बल्लेबाजी की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के बल्लेबाज को रोकना आसान नहीं है।
हरभजन के मुताबिक, अगर कोई गेंदबाज वैभव सूर्यवंशी को रोकना चाहता है तो उसे उनके खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाना होगा। वैभव की बल्लेबाजी में जिस तरह की आक्रामकता और आत्मविश्वास दिखाई देता है, वह उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
टेस्ट क्रिकेट में बड़ी पारी के लिए क्या जरूरी?
हरभजन की बातों से साफ है कि टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ आक्रामक शॉट लगाने की क्षमता काफी नहीं है। धैर्य, एकाग्रता, गेंद को छोड़ने की कला और लंबे समय तक एक ही स्तर पर बल्लेबाजी करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही गुण किसी बल्लेबाज को 100 से आगे 200 और फिर 300 रन तक पहुंचाने में मदद करते हैं।