Mahtari Vandan Yojana’ में बड़ा फर्जीवाड़ा’ सरकारी शिक्षक और क्लर्क के परिवार उठा रहे थे लाभ, अब सैलरी से होगी वसूली

Mahtari Vandan Yojana’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना में अपात्र लाभार्थियों के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक में योजना का नियम विरुद्ध लाभ लेने वाले 11 शिक्षक और क्लर्क से जुड़े मामलों की पहचान की गई है। जांच में सामने आया कि शासकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के परिवार योजना की पात्रता पूरी नहीं करने के बावजूद इसका लाभ उठा रहे थे।

प्रशासन ने अब संबंधित कर्मचारियों से योजना के तहत प्राप्त राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है।

जांच में सामने आए 11 मामले

मिली जानकारी के अनुसार बिल्हा विकासखंड में योजना के लाभार्थियों की पात्रता और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान किया गया। इस दौरान ऐसे परिवारों की पहचान हुई, जिनके सदस्य सरकारी शिक्षक या लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में योजना का लाभ पात्रता की शर्तों के आधार पर निर्धारित होता है।

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जांच के बाद 11 मामलों को चिन्हित किया गया है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इन परिवारों को योजना के तहत कितनी राशि प्राप्त हुई और किस अवधि से इसका लाभ लिया जा रहा था।

BEO के जरिए शुरू हुई वसूली

मामले में प्रशासन ने संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी है। अब कर्मचारियों से योजना के तहत प्राप्त राशि की वसूली की जाएगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बताया जा रहा है कि यदि संबंधित कर्मचारियों से सीधे राशि की वसूली नहीं होती है, तो नियमानुसार वेतन से कटौती के माध्यम से रकम वापस ली जा सकती है। हालांकि अंतिम कार्रवाई संबंधित विभागीय प्रक्रिया और आदेश के अनुसार होगी।

पात्रता की जांच पर प्रशासन का जोर

महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सहयोग देना है। ऐसे में अपात्र लोगों द्वारा योजना का लाभ लेने से वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन की ओर से अब लाभार्थियों के दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है। इस तरह की जांच के जरिए अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर उनसे राशि की वसूली की कार्रवाई की जा रही है।

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