FCRA Amendment Bill: विदेशी फंडिंग को लेकर प्रस्तावित विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की जांच कर रही संसद की संयुक्त समिति (JPC) की पहली बैठक शुक्रवार, 18 सितंबर को हुई। बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने विधेयक के पीछे सरकार के तर्क और इसके प्रस्तावित बदलावों की जानकारी समिति को दी। गृह मंत्रालय ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय हित, आंतरिक सुरक्षा और विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है।
गृह मंत्रालय ने बताए संशोधन के कारण
गृह सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने JPC को बताया कि FCRA मूल रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कानून है। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा कानून को लागू करने के दौरान कई कानूनी और परिचालन संबंधी कमियां सामने आई हैं। प्रस्तावित संशोधनों के जरिए इन कमियों को दूर करने और विदेशी योगदान के इस्तेमाल की निगरानी को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि विदेशी धन का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए जिससे राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो।
विदेशी चंदे को लेकर गृह मंत्रालय ने दिए आंकड़े
JPC की बैठक में मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में भारत में FCRA के तहत पंजीकृत संगठनों को करीब ₹22,974 करोड़ का विदेशी चंदा मिला। इसमें अमेरिका से करीब ₹12,113 करोड़, यानी लगभग 53 प्रतिशत राशि आई। ब्रिटेन करीब ₹2,414 करोड़ के साथ दूसरा बड़ा स्रोत रहा।
मंत्रालय के अनुसार, विदेशी चंदे का करीब 57 प्रतिशत सामाजिक गतिविधियों और लगभग 30 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च हुआ, जबकि धार्मिक गतिविधियों के लिए करीब 8 प्रतिशत यानी ₹1,841 करोड़ का इस्तेमाल हुआ।
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धार्मिक संगठनों को लेकर क्या कहा गया?
बैठक में धार्मिक गतिविधियों के लिए मिले विदेशी योगदान का भी आंकड़ा सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, इस श्रेणी में ईसाई संगठनों की हिस्सेदारी करीब 73.05 प्रतिशत, हिंदू संगठनों की 17.81 प्रतिशत और मुस्लिम संगठनों की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से थोड़ी अधिक बताई गई।
विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों ने विधेयक को लेकर आशंका जताई है कि इसके प्रावधानों का असर अल्पसंख्यक संस्थानों और NGO पर पड़ सकता है। वहीं गृह मंत्रालय ने JPC के सामने कहा कि प्रस्तावित संशोधन किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि विदेशी फंडिंग की निगरानी और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को संबोधित करने के लिए हैं।
क्या हैं विधेयक के अहम प्रस्ताव?
प्रस्तावित संशोधनों में विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों के संबंध में भी नया प्रावधान है। यदि किसी संगठन का FCRA पंजीकरण समाप्त, निलंबित या नवीनीकृत नहीं होता है, तो प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक नामित प्राधिकरण ऐसी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेकर उनका प्रबंधन या निपटान कर सकता है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून में विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। इसके अलावा जांच की बहुलता, दंड में असंगति, फंड के इस्तेमाल की समयसीमा और पंजीकरण समाप्त होने की प्रक्रिया जैसी समस्याओं को भी संशोधन के जरिए संबोधित करने का प्रस्ताव है।
JPC कब देगी रिपोर्ट?
FCRA Amendment Bill, 2026 को विस्तृत जांच के लिए 31 सदस्यीय JPC के पास भेजा गया है। समिति की अध्यक्षता सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं। समिति को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट संसद में सौंपनी है।