CG POLITICS : तारा कोल ब्लॉक पर सियासी संग्राम तेज, भूपेश की खुली बहस की चुनौती पर BJP का पलटवार

CG POLITICS : रायपुर। छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित तारा कोल ब्लॉक की नीलामी और इससे जुड़े पुराने फैसलों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी है। बघेल ने कहा है कि दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर चर्चा करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि तारा कोल ब्लॉक को लेकर किस सरकार के कार्यकाल में क्या निर्णय लिए गए।

भूपेश बघेल ने CM साय को दी खुली बहस की चुनौती

17 सितंबर को अंबिकापुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तारा कोल ब्लॉक के मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी। उन्होंने प्रेस क्लब में मीडिया के सामने आमने-सामने चर्चा करने की बात कही। बघेल का कहना है कि इस बहस में तारा कोल ब्लॉक की स्वीकृति, नीलामी और इससे जुड़े सरकारी फैसलों पर दस्तावेजों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

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कांग्रेस का क्या है दावा?

कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार ने 23 जून 2023 को तारा समेत नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था। पार्टी का यह भी कहना है कि जुलाई 2023 में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हसदेव-अरण्य में नई खदानों की आवश्यकता नहीं होने संबंधी रुख रखा था। कांग्रेस नेता दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि बाद में साय सरकार ने दिसंबर 2025 में तारा ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र को पत्र लिखा।

भाजपा ने पुराने फैसलों पर उठाए सवाल

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए पुराने सरकारी रिकॉर्ड का हवाला दिया है। भाजपा नेता सौरभ सिंह का दावा है कि जून 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय कोयला मंत्री के सामने तारा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) को आवंटित करने की मांग रखी थी। भाजपा इसी दावे के आधार पर कांग्रेस से उसके कार्यकाल में लिए गए फैसलों पर स्पष्टीकरण मांग रही है।

नीलामी के साथ पर्यावरण का मुद्दा भी केंद्र में

तारा कोल ब्लॉक का मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। हसदेव-अरण्य क्षेत्र के जंगल, आदिवासी समुदाय और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी इस विवाद के केंद्र में हैं। कांग्रेस ने नीलामी पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द करने की मांग की है, जबकि भाजपा का कहना है कि नीलामी और वास्तविक खनन की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों से गुजरती है तथा आवश्यक वैधानिक अनुमतियां महत्वपूर्ण होंगी।

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