नई दिल्ली। युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहे तंबाकू-मुक्त Nicotine पाउच को लेकर सरकार ने निगरानी और कार्रवाई तेज करने की तैयारी की है। इन उत्पादों की बिक्री, वितरण और विज्ञापन को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियमों के तहत कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का फोकस खास तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, स्थानीय दुकानों और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली बिक्री पर है।
क्या हैं निकोटीन पाउच?
निकोटीन पाउच छोटे पैकेट होते हैं, जिन्हें आमतौर पर होंठ और मसूड़े के बीच रखा जाता है। इनमें निकोटीन होता है, लेकिन पारंपरिक तंबाकू नहीं होता। तंबाकू-मुक्त होने के बावजूद इनमें मौजूद निकोटीन नशे की लत पैदा कर सकता है।
भारत में खाद्य उत्पादों के संबंध में FSSAI के रिकॉर्ड में स्पष्ट किया गया है कि निकोटीन को किसी खाद्य उत्पाद में नहीं मिलाया जा सकता।
ऑनलाइन बिक्री पर भी नजर
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निकोटीन डिलीवरी वाले प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री और विज्ञापन पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश पहले भी जारी किए हैं। जनवरी 2025 की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी में PECA, 2019 के तहत ई-सिगरेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम की बिक्री, ऑनलाइन बिक्री, निर्माण, वितरण, व्यापार, आयात और विज्ञापन पर रोक के प्रभावी पालन की बात कही गई थी।
अब निकोटीन पाउच की उपलब्धता को लेकर भी प्रवर्तन एजेंसियों की नजर ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार पर है।
युवाओं में बढ़ते इस्तेमाल ने बढ़ाई चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता इस बात को लेकर है कि निकोटीन पाउच को कई जगह पारंपरिक तंबाकू के विकल्प के रूप में पेश किया जाता है। तंबाकू न होने के कारण कुछ उपभोक्ता इन्हें कम नुकसान वाला उत्पाद समझ सकते हैं, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन निर्भरता पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में निकोटीन की शुरुआत आगे चलकर नियमित निकोटीन सेवन की आदत को बढ़ावा दे सकती है। इसलिए ऐसे उत्पादों की मार्केटिंग और युवाओं को लक्षित करने वाले विज्ञापनों की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कार्रवाई में किन जगहों पर फोकस?
सरकारी कार्रवाई में मुख्य रूप से पान की दुकानों, स्थानीय बाजारों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर उपलब्धता की जांच की जा सकती है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत जब्ती और अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
FSSAI की मौजूदा अधिसूचनाओं और सलाहों से भी स्पष्ट है कि खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत प्रतिबंधित या गैर-अनुमत सामग्री वाले उत्पादों पर प्रवर्तन कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का जोर अब ऐसे उत्पादों की सप्लाई और प्रचार पर निगरानी बढ़ाने के साथ युवाओं को निकोटीन की लत से बचाने पर है।