Pitru Paksha 2026 : 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध, जानें कुतुप और अपराह्न मुहूर्त समेत पूरी तिथि सूची

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान परिवार के लोग अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान तथा श्राद्ध कर्म करते हैं। इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से हुई है, जबकि 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध किया जा रहा है।

पंचांग भेद और स्थानीय परंपराओं के कारण कुछ तिथियों के श्राद्ध को एक ही दिन मनाया जा सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किस दिन कौन-सी श्राद्ध तिथि है और तर्पण या श्राद्ध के लिए कौन-सा मुहूर्त निर्धारित है।

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Pitru Paksha 2026: श्राद्ध की तिथि और मुहूर्त

26 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:35 बजे से 1:25 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:25 बजे से 3:45 बजे तक

27 सितंबर: प्रतिपदा श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:53 बजे से 1:42 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:42 बजे से 4:06 बजे तक

28 सितंबर: द्वितीया श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:31 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:24 बजे से 3:52 बजे तक

29 सितंबर: तृतीया/महा भरणी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:35 बजे से 1:23 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:23 बजे से 3:49 बजे तक

30 सितंबर: चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:22 बजे से 3:45 बजे तक

1 अक्टूबर: पंचमी श्राद्ध

कुछ स्थानीय पंचांगों में पंचमी तिथि का श्राद्ध 1 अक्टूबर को भी माना जा रहा है।

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

2 अक्टूबर: षष्ठी और सप्तमी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:31 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

3 अक्टूबर: अष्टमी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:35 बजे से 1:25 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:25 बजे से 3:45 बजे तक

4 अक्टूबर: नवमी/मातृ नवमी

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

5 अक्टूबर: दशमी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

6 अक्टूबर: एकादशी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

7 अक्टूबर: द्वादशी/मघा श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

8 अक्टूबर: त्रयोदशी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

9 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:31 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:17 बजे से 3:37 बजे तक

10 अक्टूबर: सर्व पितृ अमावस्या

पितृ पक्ष का समापन सर्व पितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दिन उन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारण से नहीं हो पाया हो।

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 1:20 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:45 बजे तक

पितरों को तर्पण देने की विधि

पितृ पक्ष में तर्पण का अर्थ श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित करना है। धार्मिक परंपरा के अनुसार तर्पण के दौरान पितरों का ध्यान किया जाता है और जल अर्पित किया जाता है।

तर्पण करते समय सामान्यतः जल में काले तिल और कुश का प्रयोग किया जाता है। पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को भोजन या दान आदि करने की परंपरा भी है।

पितृ पक्ष में इन बातों का रखें ध्यान

पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण श्रद्धा एवं नियमपूर्वक करने की परंपरा है। श्राद्ध कर्म के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है, क्योंकि मुहूर्त शहर और स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

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