रायपुर। CG News: छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों की वास्तविक स्थिति और फसल रकबे का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने के लिए राजस्व विभाग अक्टूबर में गिरदावरी की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस बार गिरदावरी में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। खेतों की ड्रोन के जरिए जियो मैपिंग कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, वहीं मैदानी अमला भी खेत-खेत पहुंचकर फसल और बुवाई की स्थिति दर्ज कर रहा है।
प्रशासन का उद्देश्य फसल के वास्तविक रकबे और स्थिति का सटीक आकलन करना है। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं, फसल बीमा, मुआवजा और अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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ड्रोन से तैयार होगा खेतों का डिजिटल रिकॉर्ड
गिरदावरी को ज्यादा सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए कई क्षेत्रों में ड्रोन सर्वे कराया जा रहा है। ड्रोन के जरिए खेतों की भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रफल और फसल की स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
ड्रोन से प्राप्त डेटा का मिलान मैदानी कर्मचारियों द्वारा तैयार की जा रही रिपोर्ट से किया जाएगा। इस प्रक्रिया से खेतों में दर्ज फसल और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर का पता लगाने में मदद मिलेगी।
गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद राजस्व अधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे। यदि रिकॉर्ड और मौके पर मिली स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी लिया जा सकता है।
अफीम और गांजे की अवैध खेती पर भी नजर
गिरदावरी के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में अफीम और गांजे की अवैध खेती पर भी निगरानी रखी जा रही है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी ऐसे संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर निगरानी बढ़ाई गई है।
राजस्व, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय के जरिए संदिग्ध क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। ड्रोन सर्वे और जियो मैपिंग से संदिग्ध स्थानों की पहचान में मदद ली जा रही है। इसके बाद संबंधित स्थानों का मैदानी स्तर पर भौतिक सत्यापन कराया जाएगा।
यदि जांच में अवैध खेती की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
48.69 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसल का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 22 सितंबर तक 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न खरीफ फसलों की बोनी पूरी हो चुकी थी।
इसमें धान के साथ मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं।
अक्टूबर में गिरदावरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश में फसलवार रकबे और वास्तविक फसल स्थिति के अधिक सटीक आंकड़े सामने आएंगे।
किसानों को योजनाओं का लाभ देने में मिलेगी मदद
अधिकारियों के अनुसार, गिरदावरी में फसल की किस्म और वास्तविक रकबा सही तरीके से दर्ज होने से किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ देने में आसानी होगी।
सटीक रिकॉर्ड का इस्तेमाल फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में मुआवजा और अन्य कृषि योजनाओं के लिए भी किया जा सकेगा। वहीं डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए प्रदेश के कृषि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन करने में प्रशासन को मदद मिलेगी।
ड्रोन सर्वे और जियो मैपिंग के इस्तेमाल से इस बार गिरदावरी को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है।