CGPSC घोटाला’ टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, नियमित जमानत याचिका खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत के अनुसार, प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य आवेदक की कथित मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत याचिका?

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में आवेदक की संलिप्तता के संकेत मिलते हैं।

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कोर्ट ने यह भी माना कि PMLA की धारा 45 के तहत नियमित जमानत देने के लिए निर्धारित कानूनी शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होती हैं। इसी आधार पर टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

CGPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का मामला

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और कथित प्रभाव के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे।

मामले की जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई। इसके साथ ही कथित अनियमितताओं से संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच भी महत्वपूर्ण रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में PMLA की धारा 45 अहम

धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 45 जमानत से संबंधित विशेष शर्तें निर्धारित करती है। इसके तहत अभियोजन पक्ष को सुनने के साथ अदालत को यह संतुष्टि भी आवश्यक होती है कि आरोपी के अपराध करने के प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार नहीं हैं और जमानत पर रहते हुए उसके दोबारा अपराध करने की संभावना नहीं है।

इसी कानूनी प्रावधान के संदर्भ में हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री का मूल्यांकन किया और राहत देने से इनकार कर दिया।

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