CG Dhan Kharidi 2026-27 : रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होने की संभावना है, जो 31 जनवरी 2027 तक चल सकती है। धान खरीदी को लेकर खाद्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और निर्देश दिए कि किसानों को पंजीयन, टोकन कटाने और धान बेचने के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
15 नवंबर से शुरू हो सकती है धान खरीदी
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सरकारी व्यवस्थाओं में से एक है। खरीफ सीजन में उत्पादित धान को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसान खरीदी केंद्रों तक पहुंचते हैं। इस वर्ष भी धान खरीदी की संभावित शुरुआत 15 नवंबर से होने की जानकारी सामने आई है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, खरीदी की प्रक्रिया 31 जनवरी 2027 तक जारी रह सकती है। हालांकि, खरीदी की अंतिम तारीख और विस्तृत कार्यक्रम के लिए राज्य शासन के आधिकारिक आदेश की पुष्टि जरूरी होगी।
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने की समीक्षा
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में धान खरीदी से संबंधित व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। इसके साथ ही पंजीयन और टोकन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने तथा धान बेचने की प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश भी दिए गए।
पंजीयन और टोकन व्यवस्था पर विशेष ध्यान
धान बेचने के लिए किसानों का पंजीयन और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार टोकन प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है। खरीदी सीजन में किसानों की संख्या बढ़ने के कारण इन व्यवस्थाओं में परेशानी होने की आशंका रहती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पंजीयन से लेकर धान खरीदी तक की प्रक्रिया में किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो। खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था सुचारु रखने के लिए समय रहते तैयारियां पूरी करने पर भी जोर दिया गया है।
खरीदी केंद्रों पर तैयारियां तेज
धान खरीदी शुरू होने से पहले केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना जरूरी है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पर्याप्त समय और सुविधाएं मिलें, इसके लिए विभागीय स्तर पर निगरानी महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा खरीदी से संबंधित नियमों और निर्देशों की जानकारी किसानों तक पहुंचाना भी जरूरी है, ताकि उन्हें प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।