Benjamin Netanyahu : इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ भविष्य में संबंधों में संभावित तनाव को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अमेरिका में ऐसा राष्ट्रपति सत्ता में आ सकता है, जिसका रुख इजराइल के प्रति विरोधी हो। ऐसी स्थिति में इजराइल को अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए दूसरे देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत करने होंगे। इसी कड़ी में नेतन्याहू ने भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।
अमेरिका पर निर्भरता कम करने की तैयारी
नेतन्याहू ने भविष्य में अमेरिका के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव की आशंका जताते हुए इजराइल को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दो साल बाद अमेरिका में ऐसा पुरुष या महिला राष्ट्रपति सत्ता में आ सकता है, जो इजराइल के प्रति विरोधी रुख अपना सकता है।
इजराइली प्रधानमंत्री के मुताबिक, ऐसी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए देश को अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करनी चाहिए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के बचे हुए समय का उपयोग करते हुए इजराइल के हितों को सुरक्षित करने के प्रयासों पर जोर दिया।
नेतन्याहू की इस रणनीति का प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल के सहयोगियों का दायरा बढ़ाना और भविष्य में किसी एक देश पर निर्भरता से पैदा होने वाले जोखिमों को कम करना है।
भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ बढ़ेगी दोस्ती
इजराइल के प्रधानमंत्री ने भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक राजनीतिक हालात में इजराइल को अन्य बड़े देशों के साथ भी अपने संबंध मजबूत करने चाहिए।
भारत और इजराइल के बीच रक्षा, तकनीक, व्यापार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना इजराइल की व्यापक विदेश नीति के लिए अहम माना जा रहा है।
इसके अलावा, नेतन्याहू ने लैटिन अमेरिकी देशों के साथ संबंधों को विस्तार देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस क्षेत्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इजराइल नए सहयोगियों की तलाश कर रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसे अधिक समर्थन मिल सके।
डोनाल्ड ट्रंप के बाद के दौर की चिंता
अमेरिका लंबे समय से इजराइल का प्रमुख सहयोगी रहा है। हालांकि, भविष्य में अमेरिकी प्रशासन की नीतियों में बदलाव आने की संभावना को देखते हुए इजराइल अपनी विदेश और सुरक्षा नीति को अधिक व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है।
नेतन्याहू की चिंता इस बात को लेकर है कि भविष्य में यदि अमेरिकी नेतृत्व का रुख इजराइल के प्रति बदलता है, तो उसका असर इजराइल की कूटनीतिक और सुरक्षा रणनीति पर पड़ सकता है।
इसी वजह से इजराइल दूसरे देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने पर ध्यान दे रहा है। भारत जैसे बड़े देश के साथ सहयोग बढ़ाना इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
नेतन्याहू की सुरक्षा नीति पर विपक्ष ने उठाए सवाल
नेतन्याहू की नई सुरक्षा नीति को लेकर इजराइल की घरेलू राजनीति में भी विवाद सामने आया है। उनके प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट ने इस पहल की आलोचना करते हुए इसे चुनाव से पहले की राजनीतिक कवायद बताया।
आइजेनकोट ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू की ओर से पेश किए गए दस्तावेज में बड़े-बड़े दावे और नारे तो हैं, लेकिन देश की मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस समाधान स्पष्ट नहीं हैं।
विपक्ष ने यह सवाल भी उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद इजराइल को विभिन्न सुरक्षा मोर्चों पर संघर्ष का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
ऐसे में नेतन्याहू की नई रणनीति कितनी प्रभावी साबित होगी और भारत समेत अन्य देशों के साथ गठबंधन मजबूत करने से इजराइल को कितना लाभ मिलेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।