Mohan Bhagwat News : नागपुर।’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक सोच का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य समस्याओं का समाधान निकालना होना चाहिए, न कि समाज में द्वेष, वैमनस्य और विभाजन को बढ़ावा देना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम को इस बार विशेष महत्व दिया जा रहा है। संघ का यह वार्षिक उत्सव हर साल विजयादशमी के दिन आयोजित किया जाता है।
संघ के शताब्दी वर्ष का विशेष आयोजन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम संगठन के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव के दौरान स्वयंसेवकों की उपस्थिति और संगठन की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम संघ की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें सरसंघचालक देश, समाज और संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपना विचार रखते हैं।
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शताब्दी वर्ष के आयोजन को लेकर संघ के कार्यकर्ताओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। इस अवसर पर संगठन की विचारधारा, सामाजिक भूमिका और भविष्य की दिशा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहते हैं।
आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए
मोहन भागवत के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का माध्यम हो सकते हैं, लेकिन इनके जरिए समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत और दूरी पैदा करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि मतभेदों को संवाद और आपसी समझ के माध्यम से दूर करने की आवश्यकता है। समाज में अलग-अलग विचारधाराओं और मान्यताओं के बावजूद लोगों के बीच सहयोग तथा सद्भाव बना रहना चाहिए। किसी भी समस्या का समाधान निकालने के लिए शांतिपूर्ण और रचनात्मक प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
विजयादशमी उत्सव का संघ में विशेष महत्व
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में विजयादशमी उत्सव की एक लंबी परंपरा रही है। इस अवसर पर संगठन के स्वयंसेवक एकत्रित होते हैं और सरसंघचालक का संबोधन सुनते हैं। संघ के स्थापना दिवस से भी इस उत्सव का विशेष संबंध है।
हर वर्ष आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में सामाजिक चुनौतियों, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और देश के विकास जैसे विषयों पर विचार रखे जाते हैं। इस बार शताब्दी वर्ष होने के कारण आयोजन का महत्व और बढ़ गया है।