Dussehra 2026 : नई दिल्ली। देशभर में आज, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में हर साल दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण दहन के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व क्यों दिया जाता है?
क्या होता है प्रदोष काल?
हिंदू पंचांग में सूर्यास्त के आसपास के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। सामान्य तौर पर यह सूर्यास्त से लेकर उसके बाद के लगभग ढाई घंटे तक की अवधि मानी जाती है। हालांकि, इसकी सटीक गणना स्थान और दिन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
धार्मिक दृष्टि से प्रदोष काल को पूजा-पाठ और विशेष अनुष्ठानों के लिए शुभ माना जाता है। विजयादशमी के अवसर पर इसी समय रावण दहन करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
रावण दहन के लिए क्यों चुना जाता है यह समय?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से है। इस दिन को अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। प्रदोष काल में रावण दहन करने के पीछे मान्यता है कि यह समय विजयादशमी के धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ होता है।
हालांकि, रावण दहन के लिए केवल प्रदोष काल ही एकमात्र नियम नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं, पंचांग और विजय मुहूर्त के अनुसार भी समय निर्धारित किया जाता है।
विजयादशमी का क्या है धार्मिक महत्व?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए लंका पर चढ़ाई की थी। युद्ध के दौरान उन्होंने रावण का वध किया और धर्म की स्थापना की। इसी घटना की याद में दशहरे पर रावण दहन किया जाता है।
वहीं, कुछ धार्मिक परंपराओं में विजयादशमी को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़कर देखा जाता है। इस तरह यह पर्व शक्ति, साहस और धर्म की विजय का संदेश देता है।