तेहरान: Donald Trump Iran Threat: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को एक और सैन्य हमले की चेतावनी दी है। ट्रंप ने संभावित कार्रवाई को ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ नाम दिया और दावा किया कि इससे ईरान अमेरिका की शर्तें मानने के लिए मजबूर हो सकता है। वहीं, ईरान ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उस पर दोबारा हमला किया गया, तो वह खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है।
ट्रंप ने दी ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ हमले की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में रिपब्लिकन पार्टी की एक चुनावी रैली के दौरान ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बार फिर ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ जैसा सैन्य अभियान चला सकता है। ट्रंप के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद ईरान समझौता करने के लिए तैयार हो सकता है।
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान समझदारी दिखाता है, तो वह बातचीत के जरिए मामले को सुलझा सकता है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाकर अपनी शर्तों पर समझौता करना चाहता है।
इससे पहले तुर्किये में अमेरिकी राजदूत और सीरिया मामलों के प्रमुख टॉम बैराक ने भी संकेत दिया था कि अमेरिका सप्ताहांत में ईरान पर हमला कर सकता है। हालांकि, ट्रंप ने इस बयान पर अनभिज्ञता जताई और कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
क्या है 28 फरवरी के हमले का पूरा मामला?
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया था। खबर के मुताबिक, इस हमले में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की मौत हो गई थी।
इस सैन्य कार्रवाई के बाद से ही मध्य पूर्व में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। अब ट्रंप की नई चेतावनी से क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी
अमेरिका की धमकी के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने ऐसी योजनाएं तैयार की हैं, जिनके तहत अमेरिका और इजरायल की ओर से दोबारा हमला किए जाने पर खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान के एक अधिकारी के मुताबिक, अगर देश पर फिर से हमला होता है, तो जवाबी कार्रवाई का दायरा सीमित नहीं रहेगा। समुद्र के नीचे मौजूद संचार केबलों से लेकर सैन्य ठिकानों और गुप्त ठिकानों तक को निशाना बनाया जा सकता है।
ईरानी अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे आग से नहीं खेलना चाहिए। इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान संभावित अमेरिकी हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने से क्या होगा?
समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन कम्युनिकेशन केबल वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क का अहम हिस्सा हैं। इनके जरिए विभिन्न देशों के बीच बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा का आदान-प्रदान होता है। अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक, वित्तीय लेनदेन और कई डिजिटल सेवाएं इन केबलों पर निर्भर करती हैं।
अगर खाड़ी क्षेत्र में इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो संबंधित देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। इससे डेटा ट्रांसफर, कारोबार और डिजिटल संचार सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किन केबलों को नुकसान पहुंचता है और वैकल्पिक नेटवर्क कितने प्रभावी ढंग से काम करते हैं।
फिलहाल, ट्रंप की धमकी और ईरान के जवाबी बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत होती है या सैन्य टकराव की स्थिति बनती है, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।