ISRO NVS-03 Launch : भारत को मिला स्वदेशी GPS सिस्टम का तोहफा’ ISRO ने लॉन्च किया नया नेविगेशन सैटेलाइट, 56 दिन में दूसरा बड़ा मिशन

ISRO NVS-03 Launch : नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष और नेविगेशन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार रात श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया। रात 11 बजकर 51 मिनट पर हुए इस लॉन्च को भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत उपग्रह में लगाई गई स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक है। इससे भारत को नेविगेशन तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

ISRO ने श्रीहरिकोटा से किया NVS-03 का सफल लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने शुक्रवार रात अपने महत्वपूर्ण नेविगेशन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इसके लिए GSLV-F18 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। रॉकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से रात 11:51 बजे उड़ान भरी और NVS-03 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित करने का लक्ष्य हासिल किया।

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इस प्रक्षेपण के साथ भारत ने अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। खास बात यह है कि यह मिशन पिछले 56 दिनों के भीतर ISRO का दूसरा बड़ा मिशन बताया जा रहा है।

स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक है मिशन की सबसे बड़ी खासियत

NVS-03 सैटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक शामिल की गई है। नेविगेशन सिस्टम में सटीक समय का बेहद महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसी समय के आधार पर किसी स्थान की सही स्थिति और दूरी की गणना की जाती है।

एटॉमिक क्लॉक की मदद से सैटेलाइट से मिलने वाले समय संबंधी संकेतों की सटीकता बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। अब स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से भारत को इस महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।

NavIC सिस्टम को मिलेगी नई मजबूती

भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC (Navigation with Indian Constellation) देश और आसपास के क्षेत्रों में सटीक लोकेशन सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है।

इसका इस्तेमाल परिवहन, समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, सैन्य जरूरतों और मोबाइल आधारित लोकेशन सेवाओं में किया जा सकता है। NVS-03 जैसे उपग्रह इस प्रणाली की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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