Amit Shah का सुरक्षा मंत्र , “कैंप अब दहशत का नहीं, बल्कि उम्मीद और मदद का प्रतीक बनेंगे”

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सुरक्षा कैंप से विकास केंद्र तक का सफर

बस्तर की गर्म दोपहर। मंच पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह। सामने बड़ी संख्या में मौजूद आदिवासी परिवार। माहौल राजनीतिक कम और उम्मीदों से भरा ज्यादा दिख रहा था। शाह ने कहा कि जिन इलाकों में पहले सुरक्षा बलों की मौजूदगी डर और संघर्ष की पहचान मानी जाती थी, वहां अब शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि “सुरक्षा वैक्यूम खत्म हो चुका है। अब विकास का समय है।” शाह के मुताबिक, आने वाले छह महीनों में यह केंद्र स्थानीय लोगों की रोजमर्रा जरूरतों का मुख्य आधार बनेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कई मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मंच के सामने बैठे ग्रामीणों के चेहरों पर उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। कुछ बुजुर्ग मोबाइल से कार्यक्रम रिकॉर्ड करते नजर आए, जबकि युवा रोजगार और भर्ती से जुड़ी घोषणाओं पर खास ध्यान दे रहे थे।

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आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार पर फोकस

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर के आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंपों के आसपास अब रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और सरकारी योजनाओं का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय युवाओं को सुरक्षा बलों और सरकारी सेवाओं में आगे लाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। 15 फीसदी आरक्षण का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इससे आदिवासी युवाओं को स्थायी अवसर मिलेंगे। सभा के दौरान कई बार तालियां गूंजीं। खासकर तब, जब शाह ने कहा कि “बस्तर अब सिर्फ नक्सलवाद की खबरों से नहीं, विकास की पहचान से जाना जाएगा।”

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