Baglamukhi Jayanti 2026 , नई दिल्ली — बगलामुखी जयंती 2026 इस बार 24 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन मां बगलामुखी की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय शत्रु बाधा और विवाद से राहत दिला सकते हैं, हालांकि यह पूरी तरह आस्था पर आधारित है।
पीली सरसों का उपाय: आस्था और परंपरा
मां बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसी कारण पूजा में पीले वस्त्र, हल्दी और पीली सरसों का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि अगर साधक इस दिन पीली सरसों का छोटा सा उपाय करता है, तो उसे मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास मिलता है।
सुबह स्नान के बाद पीले कपड़े पहनकर देवी की पूजा की जाती है। इसके बाद पीली सरसों को हाथ में लेकर मंत्र जाप किया जाता है। कई श्रद्धालु इस सरसों को बहते जल में प्रवाहित करते हैं या मंदिर में अर्पित करते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये उपाय धार्मिक विश्वास का हिस्सा हैं। इनके प्रभाव को लेकर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
मां बगलामुखी: क्यों कहा जाता है ‘शत्रु नाशिनी’
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं मानी जाती हैं। इन्हें शक्ति का वह स्वरूप माना जाता है जो नकारात्मक ऊर्जा और विरोधी ताकतों को शांत करता है। मंदिरों में इस दिन खास भीड़ देखने को मिलती है। सुबह से ही पीले रंग का माहौल। घी के दीपक। मंत्रों की गूंज। आप वहां खड़े हों, तो माहौल खुद अलग महसूस होता है।