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भाजपा नेताओं ने जताया दुख, कार्यकर्ताओं में मायूसी
भरत मटियारा लंबे समय से संगठन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे। मछुआ समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। भाजपा ने अपने आधिकारिक संदेश में लिखा कि पार्टी परिवार इस खबर से स्तब्ध है। संदेश में ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति देने और परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की गई।
रायपुर से लेकर जिलों तक पार्टी कार्यालयों में शोक चर्चा होती रही। कई कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें साझा कीं। कुछ लोगों ने लिखा कि मटियारा हमेशा जमीन से जुड़े नेता रहे। उनके पास पहुंचना आसान था। यही वजह थी कि मछुआ समाज में उनका खास प्रभाव दिखाई देता था। रविवार दोपहर तक पार्टी नेताओं और समर्थकों का उनके निवास पर पहुंचना जारी रहा। माहौल बेहद शांत था। कई कार्यकर्ता नम आंखों से एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, “ऐसा लग रहा था जैसे संगठन ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया हो।”
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संगठन और समाज के बीच मजबूत पहचान
भरत मटियारा ने मछुआ समुदाय से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया। बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कई योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने की कोशिश की थी। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनका निधन भाजपा के लिए सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी बड़ी क्षति माना जाएगा। छत्तीसगढ़ की राजनीति में क्षेत्रीय नेताओं की पकड़ अक्सर समाज आधारित नेटवर्क पर टिकी रहती है। भरत मटियारा इसी कड़ी के अहम चेहरों में गिने जाते थे। पार्टी के भीतर उनकी छवि शांत लेकिन सक्रिय नेता की थी।