BRICS 2026 : पुतिन-चिनफिंग का हाथ पकड़ा, मुस्कुराए PM मोदी’ मंच से दुनिया को दिया मजबूत संदेश

BRICS 2026 : नई दिल्ली। BRICS 2026 के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की कूटनीतिक ताकत और वैश्विक सहयोग का संदेश दिया। सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ तस्वीरें और मुलाकात चर्चा में रहीं। दोनों नेताओं का हाथ थामे और मुस्कुराते हुए पीएम मोदी की तस्वीर सामने आने के बाद इसे भारत की संतुलित विदेश नीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

पुतिन और जिनपिंग के साथ दिखी गर्मजोशी

BRICS सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के साथ नजर आए। पुतिन और जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात ने खासा ध्यान आकर्षित किया। भारत के लिए दोनों देश रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदार हैं।

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ऐसे समय में जब दुनिया में कई मोर्चों पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है, BRICS जैसे मंच पर भारत का सभी प्रमुख देशों के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

BRICS मंच से सहयोग पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के मंच से वैश्विक सहयोग, विकास और आपसी साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत का रुख लगातार यह रहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत किया जाए और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार की जाए।

BRICS का मंच भारत के लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

भारत की संतुलित कूटनीति पर नजर

पीएम मोदी की पुतिन और जिनपिंग के साथ एक ही मंच पर मौजूदगी को भारत की मल्टी-अलाइनमेंट यानी बहु-साझेदारी वाली कूटनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत एक तरफ रूस के साथ पुराने रणनीतिक संबंध बनाए रखता है, वहीं चीन के साथ सीमा और अन्य मतभेदों के बावजूद संवाद जारी रखता है।

भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख पक्ष यह है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए अलग-अलग देशों और समूहों के साथ संबंध बनाए रखे।

दुनिया को क्या संदेश?

BRICS 2026 के मंच पर पीएम मोदी का पुतिन और जिनपिंग के साथ सहज अंदाज यह संदेश देता नजर आया कि भारत वैश्विक स्तर पर किसी एक धड़े तक सीमित नहीं है। भारत अलग-अलग शक्तियों के साथ संवाद और सहयोग के रास्ते खुले रखना चाहता है।

मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह संतुलन भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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