Budha Pradosh Fast 2026 : आज महादेव और गणेश जी की कृपा पाने का विशेष संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत कथा

Budha Pradosh Fast 2026 : नई दिल्ली | आज 15 अप्रैल, 2026 को वैशाख मास का पावन बुध प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन जब यह बुधवार को पड़ता है, तो इसका फल दोगुना हो जाता है। आज के दिन भक्त न केवल देवाधिदेव महादेव की शरण में जाते हैं, बल्कि प्रथम पूज्य श्री गणेश का भी आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आगमन से पहले यानी ‘प्रदोष काल’ में की जाती है।

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  • प्रदोष पूजा समय: शाम 06:47 से रात 08:52 तक।

  • विशेष संयोग: आज ‘बुध’ ग्रह की शांति और संतान सुख के लिए किया गया दान-पुण्य अक्षय फल प्रदान करेगा।

बुध प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक नगर में एक अत्यंत धनवान व्यक्ति रहता था, जिसका विवाह बड़े ही धूमधाम से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद वह अपनी पत्नी को विदा कराने के लिए अपने ससुराल गया। उस दिन बुधवार था।

जब उसने अपनी पत्नी को विदा करने की जिद की, तो उसके सास-ससुर ने उसे समझाया कि बुधवार के दिन बेटी की विदाई या यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। लेकिन वह व्यक्ति नहीं माना और अपनी पत्नी के साथ रथ पर सवार होकर निकल पड़ा।

महादेव की लीला और चमत्कार: रास्ते में उसकी पत्नी को प्यास लगी। व्यक्ति जब लोटे में पानी लेने गया और वापस लौटा, तो वह हैरान रह गया। उसकी पत्नी के पास बिल्कुल उसकी जैसी शक्ल और वेशभूषा वाला एक दूसरा व्यक्ति बैठा था। दोनों में भीषण विवाद होने लगा कि असली पति कौन है।

तभी उस व्यक्ति ने महादेव से सच्चे मन से प्रार्थना की और अपनी गलती स्वीकार की। भगवान शिव की कृपा से दूसरा व्यक्ति अंतर्ध्यान हो गया। तभी से यह माना जाता है कि बुध प्रदोष के दिन भगवान शिव और गणेश जी की कथा पढ़ने से सभी ग्रह दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

पूजा विधि: इन बातों का रखें खास ध्यान

  1. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

  2. अभिषेक: शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।

  3. गणेश वंदना: चूंकि आज बुधवार है, इसलिए गणेश जी को दूर्वा (घास) अर्पित करना न भूलें।

  4. दीपदान: प्रदोष काल में घर के मंदिर और शिव देवालय में दीपक जलाएं।

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