‘बाय द पावर ऑफ ग्रेस्कल’: 80 के दशक का जादू फिर शुरू, सिनेमाघरों में वापसी कर रहा है ‘ही-मैन’

'By the Power of Grayskull': Recreating the magic of the '80s 'By the Power of Grayskull': Recreating the magic of the '80s
'By the Power of Grayskull': Recreating the magic of the '80s

‘बाय द पावर ऑफ ग्रेस्कल’: 80 के दशक का जादू फिर शुरू— शक्तिमान और डोरेमोन के दौर से बहुत पहले, 1980 के दशक में एक ऐसा सुपरहीरो आया था जिसने भारतीय बच्चों को अपना दीवाना बना दिया था। हाथ में चमचमाती तलवार और जुबान पर “बाय द पावर ऑफ ग्रेस्कल… आई हैव द पावर!” का डायलॉग। हम बात कर रहे हैं ‘ही-मैन’ की। तीन दशक के लंबे इंतजार के बाद, इसी लोकप्रिय शो पर आधारित लाइव-एक्शन फिल्म ‘मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स’ (Masters of the Universe) 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म के रिलीज होते ही सिनेमाघरों के बाहर 80 और 90 के दशक के दर्शकों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जो अपने बचपन की यादों को दोबारा जीने थिएटर्स पहुंच रहे हैं।

'By the Power of Grayskull': Recreating the magic of the '80s
‘By the Power of Grayskull’: Recreating the magic of the ’80s

खिलौनों का वो क्रेज जिसने बाजार में मचाई थी हलचल

80 के दशक में इस एनिमेटेड सीरीज का क्रेज सिर्फ टीवी स्क्रीन तक सीमित नहीं था। इस शो ने बच्चों के बीच मर्चेंडाइज और खिलौनों की एक नई लहर पैदा की थी। शो देखने के बाद हर बच्चा ही-मैन, स्केलेटर और बैटल कैट जैसे किरदारों के प्लास्टिक एक्शन फिगर्स खरीदने के लिए माता-पिता से जिद करने लगता था। दिल्ली के चांदनी चौक और सदर बाजार जैसे प्रमुख खिलौना बाजारों में उस दौर में इन खिलौनों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई थी। इस सीरीज ने बच्चों में ताकत का एहसास, अच्छाई और बुराई के बीच की साफ जंग और एक क्लासिक हीरो वाली फैंटेसी को मजबूती से जगाया था।

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विवादों से भी रहा था सीरीज का नाता

सफलता के साथ-साथ यह सीरीज अपने समय में विवादों के घेरे में भी आई। शो में दिखाए जाने वाले एक्शन और हिंसक दृश्यों को लेकर तत्कालीन पैरेंट्स और साइकोलॉजिस्ट्स ने चिंता जताई थी। इसके अलावा, कुछ आलोचकों ने इसे महिलाओं के रूढ़िवादी चित्रण के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इसे महिला विरोधी भी करार दिया था। इन तमाम विवादों और आलोचनाओं के बीच दो बेहद सफल सीजन पूरे करने के बाद आखिरकार इस मूल एनिमेटेड सीरीज को बंद कर दिया गया था।

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सेंटीमेंट्स और बॉक्स ऑफिस पर असर

शुरुआती के मुताबिक, फिल्म देखने आ रहे दर्शकों में 35 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है। यह वो पीढ़ी है जिसने टीवी पर केबल नेटवर्क और दूरदर्शन के शुरुआती दौर में इस शो का लुत्फ उठाया था। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि फिल्म को मिल रही यह हाइप पूरी तरह से ‘नॉस्टेल्जिया फैक्टर’ (पुरानी यादों) पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आज की ‘तगड़ी वीएफएक्स’ (VFX) देखने वाली जनरेशन-जी (Gen-Z) को यह पुरानी कहानी कितनी पसंद आती है।

 

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