CG Census Update : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 1 अगस्त से 31 अगस्त तक विशेष जनगणना सर्वे अभियान चलाया जाएगा। इस सर्वे के माध्यम से जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की जाएगी। जिला प्रशासन ने पूरे सर्वे को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है और इसके लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
9 प्रमुख सेक्शन में जुटाई जाएगी जानकारी
जिला प्रशासन के अनुसार, इस विशेष सर्वे में कुल 9 प्रमुख सेक्शन से संबंधित डाटा संग्रह किया जाएगा। इसमें शिक्षा, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, सड़क संपर्क, सार्वजनिक संस्थानों, आधारभूत ढांचे और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।
इस डाटा के आधार पर भविष्य की विकास योजनाएं तैयार करने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। प्रशासन का मानना है कि अद्यतन और सटीक आंकड़े मिलने से विभिन्न विभागों को योजनाओं के संचालन में सुविधा होगी।
400 सदस्यीय टीम करेगी सर्वेक्षण
सर्वे अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने करीब 400 लोगों की टीम गठित की है। इन टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। सर्वेयर अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का दौरा कर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
सर्वे के दौरान निर्धारित प्रारूप के अनुसार सभी सूचनाओं को डिजिटल और दस्तावेजी रूप में दर्ज किया जाएगा, ताकि डाटा का विश्लेषण आसानी से किया जा सके।
ग्राम पंचायत सचिव से लेकर CMO तक को जिम्मेदारी
इस अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। ग्राम पंचायत सचिव, पटवारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) सहित अन्य स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा प्रत्येक गांव और शहरी क्षेत्र के लिए एक-एक जिम्मेदार व्यक्ति नियुक्त किया गया है, जो सर्वे टीम के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगा।
विकास योजनाओं के लिए होगा उपयोग
जिला प्रशासन का कहना है कि इस विशेष सर्वे का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि विकास योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाना भी है। सर्वे से प्राप्त जानकारी के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं में जहां कमी होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं तैयार की जा सकेंगी।
साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं का भी आकलन किया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।