रायपुर: छत्तीसगढ़ के युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ (Chhattisgarh Staff Selection Board) का गठन कर दिया है। इसके साथ ही, लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं का संचालन कर रहे ‘छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल’ (व्यापमं) का अस्तित्व अब इतिहास के पन्नों में सिमट गया है।
क्या है नया बदलाव?
राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अधिनियम, 2026’ को लागू कर दिया है। इस नए अधिनियम के तहत अब तृतीय (Class III) और चतुर्थ (Class IV) श्रेणी के पदों पर होने वाली सभी भर्तियों की जिम्मेदारी अब इसी नवनिर्मित बोर्ड की होगी। सरकार ने व्यापमं के विलय को नए मंडल में समाहित करने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है।
नई व्यवस्था की विशेषताएं:
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एकीकृत भर्ती प्रणाली: अब अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग परीक्षाओं के बजाय, समान योग्यता वाले पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार आवेदन करने और अलग-अलग परीक्षा शुल्क देने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
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पारदर्शिता और जवाबदेही: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि इस मंडल का मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाना है। नई व्यवस्था में परीक्षा कैलेंडर को नियमित रूप से जारी किया जाएगा ताकि अभ्यर्थी अपनी तैयारी समयबद्ध तरीके से कर सकें।
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एक समान चयन प्रणाली: नया मंडल तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों के लिए एक ही मानक और चयन प्रक्रिया का पालन करेगा, जिससे भर्तियों में एकरूपता आएगी।
युवाओं के लिए क्या होंगे फायदे?
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से भर्ती प्रक्रिया में लगने वाला लंबा समय कम होगा। अक्सर देखा जाता था कि विभिन्न विभागों में भर्तियों के विज्ञापन अलग-अलग समय पर आते थे, जिससे अभ्यर्थियों को कठिनाई होती थी। नए ‘कर्मचारी चयन मंडल’ के गठन से:
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परीक्षा कैलेंडर: एक निश्चित परीक्षा कैलेंडर होगा, जिससे परीक्षाओं का समय पर आयोजन सुनिश्चित होगा।
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संसाधनों की बचत: अभ्यर्थियों के समय और धन की बचत होगी, क्योंकि उन्हें बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा।
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निष्पक्षता: मंडल को अधिक सशक्त बनाया गया है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।