CG NEWS : रायपुर, 21 जुलाई। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने दो मंत्रियों की निजी स्थापना (प्राइवेट स्टाफ) में अहम बदलाव करते हुए नए अधिकारियों की पदस्थापना की है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और उप मुख्यमंत्री अरुण साव की टीम में नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन आदेशों में एक मामले में पात्रता संबंधी शर्तों को शिथिल किए जाने का उल्लेख भी किया गया है, जिसे शासन ने विशेष प्रकरण मानते हुए मंजूरी दी है। यही कारण है कि यह फैसला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
GAD ने जारी किए अलग-अलग आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग ने दोनों मंत्रियों की निजी स्थापना में बदलाव संबंधी आदेश जारी किए। आदेश के मुताबिक संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियां संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
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सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन नियुक्तियों का उद्देश्य मंत्रियों के कार्यालयों के कामकाज को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाना है, ताकि विभागीय कार्यों की निगरानी और समन्वय बेहतर ढंग से हो सके।
विशेष प्रकरण में शर्तें की गईं शिथिल
आदेश में सबसे ज्यादा ध्यान उस बिंदु ने खींचा है, जिसमें एक अधिकारी की नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों में छूट दी गई है। शासन ने इसे “विशेष प्रकरण” बताते हुए अनुमति प्रदान की है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यतः निजी स्थापना में पदस्थापना के लिए तय सेवा शर्तों और अनुभव मानकों का पालन किया जाता है। ऐसे में विशेष छूट दिए जाने से इस निर्णय को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है।
मंत्रियों के कार्यालय में बढ़ेगा समन्वय
महिला एवं बाल विकास विभाग और उप मुख्यमंत्री कार्यालय दोनों ही राज्य सरकार के महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र माने जाते हैं। नए अधिकारियों की नियुक्ति से विभागीय फाइलों के निपटारे, योजनाओं की मॉनिटरिंग और जिलों से आने वाले प्रस्तावों पर त्वरित कार्रवाई में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले महीनों में सरकार की कई प्रमुख योजनाओं की समीक्षा और क्रियान्वयन पर विशेष जोर रहेगा, जिसके लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि विपक्षी दलों ने पात्रता शर्तों में छूट दिए जाने पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किन परिस्थितियों में यह छूट दी गई और इसके पीछे क्या प्रशासनिक आवश्यकता थी।
वहीं सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि शासन को विशेष परिस्थितियों में निर्णय लेने का अधिकार है और यह पूरी तरह नियमों के तहत किया गया है।