CG Paddy Procurement 2026 : छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, 273 चेक पोस्ट पर बढ़ेगा पहरा, तस्करों पर कसेगा शिकंजा

CG Paddy Procurement 2026 : रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होगी। खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और किसानों के नाम पर अवैध धान खपाने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रदेश के 273 चेक पोस्ट पर कड़ी नजर रखी जाएगी। दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर छत्तीसगढ़ में बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य धान खरीदी में गड़बड़ी रोकना और वास्तविक किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ दिलाना है।

15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी राज्य की प्रमुख कृषि गतिविधियों में शामिल है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने जा रही है। खरीदी शुरू होने से पहले संबंधित व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और अवैध धान की आवक पर नियंत्रण रखने पर जोर दिया जा रहा है।

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धान खरीदी के दौरान बड़ी मात्रा में उपज मंडियों और खरीदी केंद्रों तक पहुंचती है। ऐसे में सरकार के सामने वास्तविक किसानों से धान खरीदने के साथ-साथ अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की चुनौती भी रहती है।

273 चेक पोस्ट पर रहेगी कड़ी निगरानी

दूसरे राज्यों से धान की अवैध आवक रोकने के लिए प्रदेश के 273 चेक पोस्ट पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। इन चेक पोस्ट के जरिए धान के परिवहन पर नजर रखी जाएगी, ताकि बाहरी राज्यों से लाए गए धान को स्थानीय किसानों की उपज बताकर समर्थन मूल्य पर बेचने की कोशिशों को रोका जा सके।

सरकार की इस व्यवस्था से धान के अवैध परिवहन और खरीदी प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगरानी व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कोचियों और बिचौलियों पर होगी कार्रवाई

धान खरीदी के दौरान अवैध खरीद-बिक्री करने वाले कोचियों, बिचौलियों और तस्करों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। ऐसे लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जो अवैध तरीके से धान का संग्रहण, परिवहन या बिक्री करते हैं।

सरकार का जोर इस बात पर है कि समर्थन मूल्य योजना का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे और बिचौलियों के जरिए सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग न हो।

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