स्कूलों की मनमानी पर सीधा वार
सुबह का स्कूल। बैग भारी। किताबें और भी भारी। अभिभावक की जेब पर सीधा असर। यही तस्वीर बदलने की कोशिश है। सरकार ने सख्त लहजा अपनाया है। साफ निर्देश—कोई भी स्कूल अब छात्रों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं करेगा। अगर ऐसा हुआ, कार्रवाई तय है। अधिकारियों को कहा गया है कि वे जमीनी स्तर पर निगरानी रखें। शिकायत मिलते ही तुरंत जांच हो।
जारी निर्देशों के मुताबिक सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूलों में एनसीईआरटी के निर्धारित पाठ्यक्रम और किताबें ही लागू होंगी। वहीं छत्तीसगढ़ बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षा पहली से 10वीं तक एससीईआरटी की किताबों के अलावा अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।