Chaturmas 2026 : 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, जानें धार्मिक महत्व, नियम और शुभ कार्य

Chaturmas 2026 : नई दिल्ली। हिंदू और जैन धर्म में चातुर्मास (चौमास) का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह चार महीनों का पवित्र काल पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान, ध्यान और आत्मशुद्धि के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में सात्विक जीवनशैली अपनाने और धार्मिक अनुष्ठान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है और इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर होता है। वर्ष 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक रहेगा।  Chaturmas

क्या है चातुर्मास?

‘चातुर्मास’ का अर्थ है चार पवित्र महीने। इस अवधि में श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। इसी कारण इन चार महीनों को विशेष साधना और भक्ति का समय माना जाता है।

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हिंदू और जैन धर्म में क्यों है विशेष महत्व?

चातुर्मास के दौरान हिंदू धर्म में व्रत, पूजा, कथा-श्रवण, भजन-कीर्तन, दान-पुण्य और तीर्थ सेवा का विशेष महत्व होता है। वहीं जैन धर्म में साधु-संत एक स्थान पर रहकर प्रवचन, तप, स्वाध्याय और आध्यात्मिक साधना करते हैं। इस दौरान जैन समाज में पर्युषण, दशलक्षण जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व भी मनाए जाते हैं।

स्वास्थ्य के लिहाज से भी माना जाता है महत्वपूर्ण

वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीवों की संख्या अधिक हो जाती है, जिससे पाचन शक्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए चातुर्मास के दौरान सात्विक भोजन, संयमित दिनचर्या और व्रत-उपवास पर विशेष जोर दिया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार भी इस अवधि में हल्का और सुपाच्य भोजन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है।

चातुर्मास से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास का संबंध राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ा है। कथा के अनुसार, जब राजा बलि ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया, तब भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर उनसे तीन पग भूमि मांगी। दो पग में उन्होंने समस्त ब्रह्मांड नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया और कुछ समय उनके साथ रहने का वचन दिया। इसी मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी के दिन पुनः जागते हैं।

इन बातों का रखा जाता है विशेष ध्यान

  • सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण किया जाता है।
  • व्रत, जप, तप और ध्यान को महत्व दिया जाता है।
  • दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सेवा शुभ मानी जाती है।
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ और सत्संग किया जाता है।
  • संयमित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास आत्मचिंतन, आध्यात्मिक उन्नति और संयम का काल है। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष फल प्राप्त होता है।  Chaturmas

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