छत्तीसगढ़ High Court’ की फटकार’ सड़क हादसों पर सरकार से जवाब तलब, 10 खतरनाक ब्लैक स्पॉट पर मांगी रिपोर्ट

High Court’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और मौतों के मामलों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित विभागों से सड़क सुरक्षा उपायों पर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर अब तक कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।

सड़क सुरक्षा को लेकर अधिकारियों पर सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता रवींद्र शर्मा और अपूर्व त्रिपाठी ने विभिन्न जिलों से जुटाए गए अधिकृत आंकड़े अदालत के सामने रखे। उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारी अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। नियमों के अनुसार हर महीने आयोजित की जाने वाली जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें कई स्थानों पर नियमित रूप से नहीं हो रही हैं।

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अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समितियां सक्रिय नहीं रहेंगी तो दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए बनाई गई योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाएंगी।

प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट

कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में प्रदेश के कई ऐसे स्थानों का उल्लेख किया गया जहां लगातार गंभीर सड़क हादसे हो रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • रायपुर – तिल्दा नेवरा सेक्शन (NH-53)

  • अभनपुर – राजिम मार्ग

  • दुर्ग – कुम्हारी बायपास

  • भिलाई – सेंट्रल एवेन्यू रोड

  • बिलासपुर – बेलतरा क्षेत्र

  • बिलासपुर – रतनपुर मार्ग

  • कोरबा – दर्री क्षेत्र

  • रायगढ़ – जूटमिल चौक के आसपास

  • महासमुंद – बागबाहरा सेक्शन

  • जांजगीर-चांपा – अकलतरा मार्ग

इन स्थानों पर स्पीड कंट्रोल, चेतावनी संकेत, सड़क चौड़ीकरण और प्रकाश व्यवस्था की कमी को दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताया गया है।

सरकार से मांगी विस्तृत कार्ययोजना

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एनएचएआई को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक ब्लैक स्पॉट पर किए गए कार्यों, प्रस्तावित सुधारों और उनकी समयसीमा की विस्तृत जानकारी दें। साथ ही यह भी बताया जाए कि दुर्घटना रोकने के लिए कौन-कौन से इंजीनियरिंग उपाय लागू किए गए हैं।

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