Donald Trump 100% Tariff: रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाले बिल पर आज यानी 16 सितंबर को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में वोटिंग होनी है। हालांकि, भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगना अभी तय नहीं है।
भारत पर टैरिफ का कितना असर?
इस प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है। रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं। अमेरिकी सीनेट इस बिल को 7 अगस्त को 86-11 वोट से पारित कर चुकी है। अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलना बाकी है। इसके बाद बिल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा।
भारत ने क्या कहा?
अमेरिकी कदम पर भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले देश के 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता है और आगे भी इसी आधार पर फैसले लिए जाएंगे। भारत सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और रूस से तेल खरीदने की नीति में बदलाव का संकेत नहीं दिया गया है।
Sanju Samson Statement: आलोचनाओं पर खुलकर बोले संजू सैमसन, कहा- ‘हम मशीन या रोबोट नहीं हैं’
हाउस में भारत और चीन का नाम शामिल करने का प्रस्ताव
सीनेट से पारित बिल में रूस के सबसे बड़े तेल और गैस खरीदारों के नाम सीधे तौर पर नहीं दिए गए हैं। इसमें रूस से सबसे अधिक तेल और गैस खरीदने वाले पांच देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। वहीं अमेरिकी हाउस में डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर ने संशोधन पेश कर भारत और चीन समेत 10 देशों के नाम सीधे शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
इस प्रस्ताव में भारत और चीन के अलावा तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान का नाम शामिल करने की बात कही गई है।
अभी 100 फीसदी टैरिफ तय नहीं
महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी हाउस में वोटिंग होने के बावजूद भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगना फिलहाल निश्चित नहीं है। बिल को हाउस से पारित होने के बाद आगे की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ऐसे में आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह अमेरिकी कानून की अंतिम मंजूरी और उसके बाद लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।