Hindi Diwas 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के अवसर पर देशवासियों को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी का दूसरी भारतीय भाषाओं से कोई मुकाबला नहीं है। भारत की भाषाई विविधता ही उसकी ताकत है और देश की हर भाषा अपने साथ इतिहास, संस्कृति और लोक परंपराओं को आगे बढ़ाती है।
युवाओं से ज्यादा भाषाएं सीखने की अपील
अमित शाह ने युवाओं से अपील की कि वे दुनिया की ज्यादा से ज्यादा भाषाएं सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा बोलने में किसी तरह की हीन भावना नहीं होनी चाहिए। मातृभाषा लोगों को उनकी मां, मिट्टी, इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है।
गृह मंत्री ने माता-पिता से भी बच्चों के साथ अपनी मातृभाषा में बातचीत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाना केवल भाषा का विषय नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का भी माध्यम है।
‘देश के किसी भी कोने में हिंदी से सीधे जुड़ते हैं आम लोग’
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी मातृभाषा गुजराती है, लेकिन जब वह देश के अलग-अलग हिस्सों में जाते हैं तो आम लोगों से सीधे जुड़ने में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि हिंदी को किसी अन्य भारतीय भाषा के खिलाफ खड़ा करना सही नहीं है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आजादी के बाद भारतीय भाषाओं ने राष्ट्र निर्माण, प्रशासन और विकास को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गैर-हिंदी भाषी महापुरुषों का भी हिंदी के लिए योगदान
अमित शाह ने हिंदी के विकास में गैर-हिंदी भाषी महापुरुषों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी, फिर भी उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखा।
उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की थी। वहीं, बंगाली भाषी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज में हिंदी को संवाद की भाषा के रूप में इस्तेमाल किया और देश को ‘जय हिंद’ का नारा दिया।
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औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का भी जिक्र
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से औपनिवेशिक मानसिकता की गुलामी से मुक्ति का आह्वान किया है। उनके मुताबिक भाषा भी इस मानसिकता से बाहर निकलने और राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अमित शाह ने राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किए जाने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के बनाए आपराधिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए। उन्होंने इसे केवल शब्दों में बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव की पुनर्स्थापना बताया।
14 सितंबर को मनाया जाता है हिंदी दिवस
हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की याद में हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है।