IPS Promotion : रायपुर, 19 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य में तीन नए विशेष पुलिस महानिदेशक (स्पेशल डीजी) पदों के सृजन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय में नई जिम्मेदारियों के बंटवारे और वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस घटनाक्रम को राज्य के पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पदोन्नति की दौड़ में एसआरपी कल्लूरी, प्रदीप गुप्ता और विवेकानंद सिन्हा के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
तीन नए स्पेशल डीजी पदों से खुलेंगे पदोन्नति के रास्ते
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से तीन नए स्पेशल डीजी पदों के सृजन को मंजूरी मिलने के बाद वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इन पदों के जरिए पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ स्तर पर जिम्मेदारियों का नए सिरे से निर्धारण किया जा सकता है।
स्पेशल डीजी का पद पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस स्तर पर अधिकारियों को कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और विभिन्न पुलिस इकाइयों के संचालन जैसी अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। हालांकि, पदों के सृजन के बाद वास्तविक पदस्थापना और जिम्मेदारियों का निर्धारण शासन के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा।
एसआरपी कल्लूरी समेत तीन नाम चर्चा में
स्पेशल डीजी पद पर पदोन्नति की संभावित दौड़ में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं।
- एसआरपी कल्लूरी: 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी।
- प्रदीप गुप्ता: 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी।
- विवेकानंद सिन्हा: 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी।
बताया जा रहा है कि तीनों अधिकारी वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) स्तर पर पुलिस मुख्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। नए पदों के सृजन से उनकी पदोन्नति और भविष्य की प्रशासनिक भूमिकाओं को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
हालांकि, इन अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर अभी अंतिम आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित प्रशासनिक बदलाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस मुख्यालय में बदल सकता है जिम्मेदारियों का समीकरण
नए स्पेशल डीजी पदों के सृजन का असर पुलिस मुख्यालय में जिम्मेदारियों के वितरण पर भी पड़ सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों को नई भूमिकाएं मिलने की स्थिति में विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था में बदलाव संभव है।
इसके साथ ही भविष्य में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चयन से जुड़े समीकरणों पर भी इस घटनाक्रम का प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, डीजीपी चयन की प्रक्रिया अलग नियमों और निर्धारित मानकों के तहत होती है।